दिल्ली दंगा मामला : शरजील इमाम, उमर खालिद ने नयी जमानत याचिकाएं दायर कीं

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दिल्ली दंगा मामला : शरजील इमाम, उमर खालिद ने नयी जमानत याचिकाएं दायर कीं

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 02:18 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 02:18 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 के दंगा मामले में बड़ी साजिश से जुड़े मामले में कार्यकर्ता शरजील इमाम और उमर खालिद ने यहां एक अदालत में नयी जमानत याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाओं में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा उनकी पिछली जमानत याचिका खारिज किए जाने के छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध सैनी के समक्ष दायर इन नयी याचिकाओं पर अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई चार जुलाई के लिए निर्धारित कर दी।

अपनी याचिका में शरजील इमाम ने कहा कि वह पिछले छह वर्षों से हिरासत में है और पांच जनवरी को उच्चतम न्यायालय द्वारा उसकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि पांच अन्य आरोपियों को राहत प्रदान कर दी थी।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की तत्कालीन पीठ ने कहा था कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि मामले के सभी आरोपी ‘‘भागीदारी के स्तर’’ के संदर्भ में समान स्थिति में नहीं हैं।

इसने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी थी।

उमर खालिद, शरजील इमाम और कई अन्य लोगों के खिलाफ यूएपीए तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ होने का आरोप है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध के दौरान भड़की इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

आरोपियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के दो सितंबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसमें साजिश मामले में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल