दिल्ली : शाहदरा के लकड़ी बाजार को पशु-गाड़ी मुक्त घोषित किया गया

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दिल्ली : शाहदरा के लकड़ी बाजार को पशु-गाड़ी मुक्त घोषित किया गया

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  • Publish Date - July 2, 2026 / 08:15 PM IST,
    Updated On - July 2, 2026 / 08:15 PM IST

नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) शाहदरा के लकड़ी बाजार के आखिरी 10 पशु-चालित गाड़ियों के मालिकों को ई-रिक्शा मुहैया करा दिये जाने के बाद बाजार को पशुओं का इस्तेमाल कर चलाने वाली गाड़ियों से मुक्त घोषित कर दिया गया है। एक पशु अधिकार संगठन ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

इससे पहले नांगलोई के असम लकड़ी बाजार को भी पशु-गाड़ी मुक्त किया गया था।

संगठन ने कहा कि इस नवीनतम हस्तांतरण के साथ, इस परियोजना के तहत 200 से अधिक पशु-गाड़ियों के पूर्व मालिकों का पुनर्वास किया जा चुका है और 200 से अधिक बैलों, घोड़ों तथा अन्य अश्ववंशी पशुओं की जगह बैटरी चालित ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।

बयान के अनुसार, रोहतास नगर की नगर निगम पार्षद शिवानी पंचाल ने दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही को पत्र लिखकर चार जनवरी 2010 को पारित दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के उस प्रस्ताव को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया है, जिसमें शहर में घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले तांगों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया था।

शिवानी पंचाल ने कहा, ‘पशु अपने प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए हैं, न कि शहरों या बाजारों में। इन ई-रिक्शा ने पूर्व पशु-गाड़ी मालिकों को अधिक टिकाऊ आजीविका अपनाने में मदद की है, और साथ ही बाजारों को अधिक व्यवस्थित बनाया है।’

पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के पक्षधर लोग (पेटा) इंडिया के वरिष्ठ प्रबंधक महेश त्यागी ने कहा कि पशु-चालित गाड़ियों को ई-रिक्शाओं से बदलना काम करने वाले जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता को रोकने में मदद करता है, साथ ही यह परिवारों को अधिक स्थिर आजीविका का एक बेहतर साधन भी प्रदान करता है।

पेटा इंडिया के अनुसार, उसका दिल्ली मशीनीकरण प्रोजेक्ट बैलों, गधों, टट्टुओं और घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली पशु-चालित गाड़ियों को यांत्रिक विकल्पों से बदलने का लक्ष्य रखता है, साथ ही इन गाड़ियों के मालिकों की आजीविका को भी समर्थन प्रदान करता है।

संगठन ने कहा कि यांत्रिक विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद दिल्ली में अब भी सैकड़ों बैलों और घोड़ों का उपयोग गाड़ियां और तांगे खींचने के लिए किया जाता है।

भाषा तान्या रंजन

रंजन