दिल्ली: अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद तुर्कमान गेट पर दुकानें बंद, सड़कों पर तनाव

दिल्ली: अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद तुर्कमान गेट पर दुकानें बंद, सड़कों पर तनाव

दिल्ली: अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद तुर्कमान गेट पर दुकानें बंद, सड़कों पर तनाव
Modified Date: January 7, 2026 / 02:57 pm IST
Published Date: January 7, 2026 2:57 pm IST

(वर्षा सागी)

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके के पास बुधवार को संकरी गलियों में दुकानें बंद, गिरे हुए स्कूटर, टूटी टाइलें और पत्थर बिखरे पड़े दिखाई दिये।

अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा के बाद इलाके में तनाव का माहौल और भारी सुरक्षा बल तैनात है।

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फैज-ए-इलाही मस्जिद और पास के कब्रिस्तान से सटी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर कथित रूप से पथराव किया और कांच की बोतलें फेंकीं, जिसमें कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।

छतों से और लोहे के बंद दरवाजों के पीछे से लोग इलाके भर में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर चिल्लाते हुए देखे गए।

बच्चे भी बालकनियों व दरवाजों के पीछे से चीखते और रुमाल लहराते हुए नीचे का दृश्य देख रहे थे लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी के कारण अधिकांश निवासी अपने घरों के अंदर ही रहे।

सड़क किनारे से बच्चे टूटी हुई छड़ें व ढीले तार उठाते हुए और अभियान के बाद बचे मलबे को सावधानीपूर्वक हटाते हुए भी देखे गए।

सड़कें लगभग खाली थीं लेकिन उन पर हिंसा के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे, जिनमें कई जगहों पर क्षतिग्रस्त टाइलें, टूटे हुए कांच और पत्थर बिखरे पड़े थे।

मस्जिद से सटी गलियों में दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और किसी भी प्रकार की झड़प को रोकने के लिए कई स्थानों पर कर्मियों को तैनात किया गया था।

प्रमुख प्रवेश द्वारों पर अवरोधक लगाए गए हैं और सभी नागरिकों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। केवल पुलिस और दिल्ली नगर निगम के वाहनों को ही क्षेत्र से गुजरने की अनुमति है।

सुरक्षाकर्मी लगातार गलियों में गश्त कर रहे हैं और इलाके को खाली करा रहे हैं। वहीं कई लोगों को पुलिस की गाड़ियों में बिठाकर इलाके से ले जाते हुए भी देखा गया। इलाके की अधिकांश दुकानें बंद रहीं, जिससे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले इस क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ था।

एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि उसने एहतियात के तौर पर अपनी दुकान बंद रखी।

उसने सड़क पर बिखरे मलबे की ओर इशारा करते हुए कहा, “हमने सब कुछ बंद कर दिया और अंदर ही रहे।”

एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि वह इस इलाके में 50-60 वर्षों से रह रहा है और उसने मस्जिद से सटी जमीन को कब्रिस्तान जैसा बताया।

उसने कहा, “यह जगह और कुछ नहीं है। मैंने वर्षों से यहां लोगों को दफनाते देखा है।”

निवासी ने बताया कि कई लोग इस दृश्य को देखकर निराश थे।

उसने कहा,“कब्रिस्तान के साथ जो हुआ उससे लोग नाराज हैं।”

एक स्थानीय ऑटो चालक ने बताया कि मंगलवार को यह अफवाह फैल गई थी कि मस्जिद को गिराया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “वास्तव में, केवल दुकानें और अन्य ढांचे जैसी अवैध इमारतें ही हटाई गईं।”

ऑटो चालक ने कहा कि गलत सूचना के कारण अचानक अफरा-तफरी मच गई। उन्होंने कहा, “कल (मंगलवार को) हालात बहुत बिगड़ गए थे लेकिन अब स्थिति थोड़ी शांत है।”

एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों पर चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हुई हिंसा के संबंध में कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

लगभग 30 बुलडोजर और 50 डंपर तैनात किए गए, साथ ही 300 से अधिक नगर निगम कर्मचारी और अधिकारी अदालत द्वारा अवैध घोषित अतिक्रमणों को हटाने में लगे हुए हैं।

अभियान शुरू होने से पहले ही लगभग 100 . 150 लोग घटनास्थल पर जमा हो गए और पुलिस से भिड़ गए।

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और बताया कि प्रदर्शनकारियों पर हल्का बल प्रयोग किया।

पुलिस के मुताबिक, पथराव की घटना में शामिल लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है और इस बात की जांच की जा रही है कि हिंसा अचानक हुई थी या पूर्व नियोजित थी।

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही जांच के तहत गवाहों और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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