नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने को लेकर बढ़ते विवाद के बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने सोमवार को जोर दिया कि नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत तैयार की जा रही अंतिम मतदाता सूची से नाम हटा दिए जाएंगे।
इस संबंध में एक बयान में कहा गया कि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाताओं को विवरण दोबारा जमा करने में मदद करने और नोटिस के साथ-साथ दावों एवं आपत्तियों का सुचारू निपटारा सुनिश्चित करने के लिए 70 विधानसभा क्षेत्रों में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के अलावा अतिरिक्त सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की तैनाती भी की है।
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल उन कई प्रमुख लोगों में शामिल हैं, जिन्हें विवरण में असमानता या अन्य विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।
जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं उनकी एक सूची कारणों के साथ प्रकाशित की गई है। इनमें 2002 के एसआईआर से विवरण का मिलान नहीं होना और नाम तथा उम्र में अंतर जैसी कई विसंगतियां शामिल हैं।
सीईओ कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘नोटिस जारी होने का यह मतलब नहीं है कि उनका (मतदाताओं का) नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।’’
इन मतदाताओं को 29 अक्टूबर तक जरूरी विवरण उपलब्ध कराने का अवसर दिया गया है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन चार नवंबर को किया जाएगा। 31 अगस्त को प्रकाशित दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची में 97 लाख से अधिक नाम शामिल थे, जिनमें से 33 लाख से अधिक मतदाताओं को विभिन्न विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
भाषा आशीष नेत्रपाल
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