दिल्ली : साकेत में इमारत ढहने की घटना के बाद छात्रों पर ठिकाना बदलने का दबाव, परिजनों की बढ़ी चिंता

दिल्ली : साकेत में इमारत ढहने की घटना के बाद छात्रों पर ठिकाना बदलने का दबाव, परिजनों की बढ़ी चिंता

दिल्ली : साकेत में इमारत ढहने की घटना के बाद छात्रों पर ठिकाना बदलने का दबाव, परिजनों की बढ़ी चिंता
Modified Date: June 3, 2026 / 11:40 am IST
Published Date: June 3, 2026 11:40 am IST

(वर्षा सागी )

नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) दक्षिण दिल्ली के साकेत क्षेत्र में बहुमंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद समीपवर्ती सैदुलाजाब इलाके में रहने वाले छात्रों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल है। छात्रों का कहना है कि उनके परिजन लगातार फोन कर उनका हालचाल ले रहे हैं और उन्हें किसी अन्य स्थान पर रहने के लिए कह रहे हैं।

साकेत का सैदुलाजाब इलाका छात्रों का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास, छात्रावास, किराये के मकान, कैफे और कैंटीन स्थित हैं। शनिवार को ध्वस्त हुई इमारत में एक कोचिंग संस्थान, कैफे और कार्यालय संचालित होते थे तथा घटना के समय उसकी सबसे ऊपरी मंजिल पर निर्माण कार्य चल रहा था।

इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी जबकि आठ अन्य घायल हुए थे।

चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे 26 वर्षीय अंकित कुमार ने कहा, ‘‘घटना को तीन दिन हो गए हैं, लेकिन मेरे परिवार का डर अभी भी कम नहीं हुआ है। मैं पास की गली में रहता हूं और आज भी मुझे इमारत गिरने की आवाज याद है।’’

उन्होंने कहा कि वह आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के कई लोग अपने कमरों से बाहर निकल आए थे।

कुमार ने कहा, ‘‘आवाज इतनी जोरदार थी कि हममें से कई लोग यह देखने के लिए बाहर दौड़े कि आखिर हुआ क्या है। अब भी मेरे माता-पिता दिन में कई बार फोन कर पूछते हैं कि मैं सुरक्षित हूं या नहीं और वहां हालात कैसे हैं।’’

उन्होंने बताया कि उनके गृह नगर में रहने वाले रिश्तेदार और मित्र भी लगातार उनसे संपर्क कर रहे हैं।

कुमार ने कहा, ‘‘मेरे माता-पिता अब मुझ पर दूसरा पीजी तलाशने का दबाव बना रहे हैं। लेकिन छात्रों के लिए यह सबसे सुविधाजनक स्थान है।’’

चिकित्सा की छात्रा रिया शर्मा ने कहा कि हादसे के बाद से उनके परिवार के सदस्य लगातार उनकी सुरक्षा को लेकर आश्वासन मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उस दिन के बाद से परिवार के लोगों के लगातार फोन आ रहे हैं। वे बार-बार पूछ रहे हैं कि जहां मैं रह रही हूं, वह जगह सुरक्षित है या नहीं।’’

शर्मा ने बताया कि हादसे के बाद उनके कोचिंग संस्थान के शिक्षकों ने भी छात्रों से संपर्क किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे माता-पिता भी मुझे दूसरा आवास तलाशने के लिए कह रहे हैं, लेकिन परीक्षा की तैयारी के बीच अचानक स्थान बदलना आसान नहीं है। इलाके में रहने वाले छात्रों के बीच निश्चित रूप से चिंता का माहौल है।’’

एक अन्य पीजी निवासी छात्र ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कहा कि इस घटना ने छात्रों के आसपास की इमारतों को देखने का नजरिया बदल दिया है।

उसने कहा, ‘‘अब भी रिश्तेदारों के फोन आ रहे हैं और वे पूछ रहे हैं कि सब कुछ ठीक है या नहीं। यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही और बहुत से लोग जानते हैं कि मैं इसी इलाके में रहता हूं, इसलिए उनकी चिंता स्वाभाविक है।’’

एक अन्य छात्र ने कहा कि इलाके के कई छात्र इसी तरह के दबाव का सामना कर रहे हैं।

उसने कहा, ‘‘इस घटना ने अनिश्चितता की भावना पैदा कर दी है क्योंकि कोई भी ऐसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति की कल्पना नहीं करना चाहता।’’

स्थानीय ऑटो-रिक्शा चालकों के अनुसार, हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल देखने के लिए भी पहुंच रहे हैं।

साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट रहने वाले ऑटो चालक राजेश ने कहा, ‘‘कई यात्री विशेष रूप से हमें घटनास्थल के पास से ले चलने को कहते हैं क्योंकि वे यह देखना चाहते हैं कि इतना बड़ा हादसा आखिर कैसे हुआ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम लगातार वहां के चक्कर लगा रहे हैं। यहां तक कि जिन लोगों का इस इलाके से कोई संबंध नहीं है, वे भी खुद जाकर देखना चाहते हैं।’’

एक अन्य ऑटो चालक सुनील ने बताया कि कुछ लोग घटनास्थल पर कुछ समय बिताते हैं और फिर लौट जाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग वहां खड़े होकर इलाके का निरीक्षण करते हैं, तस्वीरें लेते हैं और स्थानीय निवासियों से बातचीत करते हैं। इस घटना को लेकर लोगों की दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है।’’

घटनास्थल पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि जिज्ञासावश लोगों का वहां आना जारी है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘कई लोग क्षतिग्रस्त इमारत को देखने और हादसे की गंभीरता को समझने के लिए पहुंच रहे हैं।’’

उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी अब भी तैनात हैं।

अधिकारी ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए कर्मियों की तैनाती की गई है कि कोई भी व्यक्ति असुरक्षित या प्रतिबंधित हिस्सों में प्रवेश न करे। पूरे दिन जिज्ञासु लोगों का आना-जाना बना रहता है।’’

भाषा मनीषा रंजन

रंजन


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