नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) दिल्ली चिड़ियाघर में पिछले दो दशकों से अकेले रह रहे मिस्र के गिद्ध ‘जटायु’ को आखिरकार एक साथी मिलने की संभावना बनी है। इस उम्रदराज पक्षी की खातिर सही जोड़ा तलाशने के लिए चिड़ियाघर प्रशासन अन्य राज्यों के दो चिड़ियाघरों के साथ बातचीत कर रहा है।
जटायु को दिल्ली प्रवास के दौरान बचाया गया था और 20 से अधिक साल पहले राष्ट्रीय प्राणि उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) लाया गया था। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अन्य गिद्धों की मौत के बाद से यह यहां अकेला रह रहा था।
दिल्ली चिड़ियाघर के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जटायु के जोड़े के लिए दो चिड़ियाघरों के साथ बातचीत जारी है। हालांकि, यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और जिन संस्थानों पर विचार किया जा रहा है उनके नामों का खुलासा नहीं किया गया है।
अधिकारी ने कहा कि चिड़ियाघर की एक टीम हरियाणा के पिंजौर स्थित संरक्षण केंद्र का भी दौरा करेगी, जहां छह सितंबर को अधिकारी गिद्ध प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रम को समझने जाएंगे।
पिंजौर स्थित यह केंद्र गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘जिप्स’ प्रजाति के गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन के लिए हरियाणा वन विभाग और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है।
मिस्र के गिद्ध आमतौर पर चार से पांच साल की उम्र में प्रजनन शुरू करते हैं और लंबे समय के लिए जोड़े बनाते हैं। ये आमतौर पर प्रति प्रजनन सत्र केवल एक अंडा देते हैं, और अंडे को सेने से लेकर चूजे के पालन-पोषण तक में नर और मादा दोनों की भागीदारी होती है।
ये पक्षी जंगल में आमतौर पर लगभग 25 साल, जबकि चिड़ियाघर या देखरेख में इससे भी अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। इस वजह से ये पक्षी कई सालों तक प्रजनन के लिए सक्रिय रह सकते हैं।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पक्षियों या जानवरों को सीधे नहीं लाया जा सकता; उन्हें पशु विनिमय कार्यक्रम या उपहार जैसे स्वीकृत तंत्रों के माध्यम से ही प्राप्त किया जाता है।
जटायु अकेला ऐसा जीव नहीं है। राष्ट्रीय प्राणि उद्यान अपनी 16 ऐसी प्रजातियों के लिए साथियों की तलाश कर रहा है जो या तो अकेले हैं या केवल एक ही लैंगिक समूहों में रह रहे हैं। इसका उद्देश्य चिड़ियाघर में प्रजनन को बढ़ावा देना और जीवों में आनुवंशिक विविधता लाना है।
चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बताया कि कई राज्यों के चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय के प्रस्तावों पर विभिन्न चरणों में चर्चा जारी है। फिलहाल मुख्य ध्यान अकेले या एक ही लिंग वाले जानवरों का जोड़ा बनाने और चिड़ियाघर के कुनबे में नया आनुवंशिक प्रवाह लाने पर है।
अकेले जीवों के लिए साथी खोजने के प्रयासों के साथ-साथ चिड़ियाघर अपने संग्रह का विस्तार करने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। प्रस्तावित आधुनिकीकरण योजना के तहत, राष्ट्रीय प्राणि उद्यान ने लाए जाने वाले जीवों में 109 नयी प्रजातियों और 2,943 जानवरों की पहचान की है, जिससे इसकी कुल क्षमता 201 प्रजातियों तक पहुंच जाएगी।
भाषा सुमित नरेश
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