दिवाली के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’, ‘आप’ और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

दिवाली के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब', ‘आप’ और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू

दिवाली के बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’, ‘आप’ और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू
Modified Date: October 22, 2025 / 09:14 pm IST
Published Date: October 22, 2025 9:14 pm IST

(तस्वीरों के साथ जारी)

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) दिवाली के दो दिन बाद भी राष्ट्रीय राजधानी बुधवार को धुंध की चादर में लिपटी रही और वायु गुणवत्ता ‘‘बहुत खराब’’ श्रेणी में रही।

दिल्ली में वायु प्रदूषण की जिम्मेदारी को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच वाकयुद्ध छिड़ गया है।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता हवा की गति फिर से कम हो जाने के कारण बुधवार को थोड़ी खराब हो गई।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन के अनुसार, बुधवार शाम चार बजे शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 353 रहा।

यह इस मौसम में अब तक का सबसे अधिक दर्ज किया गया एक्यूआई है। एक्यूआई मंगलवार को 351 और सोमवार को 345 था।

दिन के समय दिल्ली में धुंध छाई रही और हवा की गति सात किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक नहीं रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आने वाले दिनों में प्रदूषण बढ़ने का अनुमान जताया है।

आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक कृष्ण मिश्रा ने कहा, ‘‘हवा की दिशा पूर्व से पश्चिमी हो गई है, लेकिन गति कम बनी हुई है। रात के समय हवा लगभग धीमी बनी हुई है और दिन के समय इसकी गति केवल 5-7 किमी प्रति घंटे तक ही रहती है।’’

उन्होंने कहा कि 27 अक्टूबर के आसपास एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव की उम्मीद है, लेकिन इससे भारी बारिश या हवा की गति में वृद्धि होने की संभावना नहीं है।

केंद्र की वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (ईडब्ल्यूएस) के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि दिल्ली का एक्यूआई शनिवार तक ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बना रहेगा, जिसके बाद अगले छह दिनों तक यह ‘खराब’ और ‘बेहद खराब’ के बीच रह सकता है।

सीपीसीबी के आंकड़ों से पता चला है कि 39 सक्रिय निगरानी केंद्रों में से तीन ने बुधवार शाम चार बजे प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ दर्ज किया, जबकि 33 ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रहे।

सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके नेहरू नगर (एक्यूआई 411), पंजाबी बाग (406) और वजीरपुर (406) थे। केवल तीन स्टेशन – लोधी रोड (230), डीटीयू (216) और आईजीआई एयरपोर्ट (294) – ने 300 से नीचे एक्यूआई दर्ज किया।

इस बीच, दिल्ली में बुधवार को अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से थोड़ा कम है जबकि रात का तापमान 21.8 डिग्री सेल्सियस रहा जो औसत से तीन डिग्री अधिक है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, एक्यूआई को शून्य से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच को ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच को ‘खराब’, 301 से 400 के बीच को ‘बहुत खराब’ तथा 401 से 500 के बीच को ‘गंभीर’ माना जाता है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिवाली से पहले और बाद में वायु प्रदूषण के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में इस साल इसमें सुधार हुआ है।

गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इस साल दिवाली से पहले और बाद में (औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के बीच) अंतर पिछले साल की तुलना में कम है, भले ही इस बार पटाखे जलाने की अनुमति दी गई थी।’’

आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर दिवाली की रात प्रदूषण निगरानी केंद्रों को बंद करने और वायु गुणवत्ता सूचकांक के आंकड़ों में हेरफेर कर स्थिति को छिपाने का आरोप लगाया। वहीं, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने राष्ट्रीय राजधानी की ‘बेहद खराब’ वायु गुणवत्ता के लिए पंजाब में पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराया।

पंजाब में इस वर्ष 15 सितंबर से 21 अक्टूबर के बीच पराली जलाने की 415 घटनाएं दर्ज की गयीं, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,510 घटनाएं दर्ज की गयी थीं।

यह भारी गिरावट अक्टूबर के पहले सप्ताह तक राज्य में बारिश के कारण धान की कटाई में देरी के बीच आई है। पंजाब में बाढ़ से हुए नुकसान के कारण भी कुछ जगहों पर फसल की कटाई में देरी हुई।

‘आप’ की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार ने एक्यूआई की ‘रीडिंग’ लगभग 350 दिखाकर ‘सरकारी स्तर पर डेटा चोरी’ की, जबकि वास्तविक स्तर 1,700 को पार कर गया था।

उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) द्वारा संचालित कई निगरानी केंद्र एक ही समय में बंद हो गए और हवा साफ होने के बाद ही चालू हुए। यह दिल्ली के लोगों के साथ बेईमानी और छल है।’

इन आरोपों का जवाब देते हुए सिरसा ने कहा, ‘(आप प्रमुख) अरविंद केजरीवाल ने न केवल दिल्ली, बल्कि पंजाब को भी बर्बाद कर दिया है। पंजाब की हवा अब प्रदूषित हो गई है। पंजाब में कभी बहुत साफ हवा थी, लेकिन अब वहां की हवा खराब हो गई है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर हम दिल्ली का प्रदूषण साफ कर सकते हैं, तो पंजाब-जो पहले से ही साफ है- उसे ऐसा क्यों नहीं रखा जा सकता?’’

सिरसा ने मंगलवार को पंजाब की ‘आप’ नीत सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण बढ़ाने के लिए किसानों को पराली जलाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।

‘आप’ विधायक संजीव झा ने कहा कि भाजपा सरकार ने सच्चाई छिपाने के लिए डीपीसीसी और सीपीसीबी के आंकड़े ‘मिटा’ दिए हैं।

उन्होंने कहा, ‘हर दिल्लीवासी ने अपने फ़ोन पर 1,000 से 1,500 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक देखा, लेकिन सरकार ने प्रदूषण की स्थिति से ही इनकार कर दिया।’

उन्होंने प्रशासन से कृत्रिम वर्षा और शीतकालीन कार्य योजना के अपने वादे को लागू करने का आग्रह किया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक कथित दस्तावेज भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया कि दिल्ली सचिवालय में मंत्रियों के कमरों के लिए 15 ‘एयर प्यूरीफायर’ खरीदे जा रहे हैं।

झा ने कहा, ‘‘दिल्ली की सड़कों पर बच्चे, बुजुर्ग और आम लोग सांस में जहर भर रहे हैं लेकिन रेखा गुप्ता की दिल्ली सरकार के मंत्रियों ने तो पहले ही अपनी सांसें बचाने की तैयारी कर ली है।

उन्होंने कहा, ‘‘सचिवालय में मंत्रियों के दफ्तरों के लिए 15 नए एयर प्यूरीफायर खरीदे जा रहे हैं। एक प्यूरीफायर की कीमत 36,345 रुपए है। लाखों रुपये केवल मंत्रियों को ‘साफ़ हवा’ देने के लिए खर्च किए जा रहे हैं। जनता को सिर्फ वादे और मंत्रियों के लिए शुद्ध हवा — यही है ‘दिल्ली मॉडल’।’’

उनके दावे पर दिल्ली सरकार या भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी।

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि ‘आप’ नेताओं द्वारा प्रदूषण के लिए पटाखों को जिम्मेदार ठहराने वाले बयान उनकी ‘‘राजनीतिक हताशा’’ का प्रतिबिंब होने के साथ-साथ अल्पसंख्यकों को खुश करने की उनकी ‘‘सनातन विरोधी नीति’’ का प्रमाण है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में दिल्ली में प्रदूषण में मामूली वृद्धि हुई है लेकिन इसका प्राथमिक कारण पटाखे नहीं, बल्कि पंजाब में ‘आप’ सरकार की ‘लापरवाही’ के कारण पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं हैं।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश


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