वन्यजीव शिकार रोधी गैर-सरकारी संगठन वाइल्डलाइफ एसओएस की गतिविधियों की जांच की मांग
वन्यजीव शिकार रोधी गैर-सरकारी संगठन वाइल्डलाइफ एसओएस की गतिविधियों की जांच की मांग
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) सहित विभिन्न अधिकारियों को पत्र लिखकर ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ जैसे वन्यजीव संरक्षण संगठनों की गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से संयुक्त जांच कराने की मांग की है।
दुबे ने 18 अगस्त को लिखे अपने पत्र में कहा कि ऐसे संगठनों के पास वैधानिक मान्यता नहीं है, फिर भी वे कई राज्यों के संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में अपना कामकाज चला रहे हैं।
उदाहरण के लिए, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) द्वारा 2017 में दिए गए एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) जवाब से खुलासा हुआ था कि वाइल्डलाइफ एसओएस के मथुरा स्थित केंद्र को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38एच के तहत सीजेडए द्वारा मान्यता नहीं दी गई थी।
दुबे ने कहा, ‘जब यह संगठन बिना किसी वैधानिक मान्यता के केंद्रों का संचालन कर रहा है, तो किस आधार पर इसे 19 राज्यों के संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में हस्तक्षेप करने की अनुमति दी गई? इस संगठन की पैठ बहुत गहरी है और इसने मध्य प्रदेश वन विभाग सहित कई राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।’
वन्यजीव कार्यकर्ता का यह पत्र उन खबरों के कुछ दिनों बाद आया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि वाइल्डलाइफ एसओएस का शिकारियों और तस्करी के नेटवर्क से संबंध है।
खबरों के अनुसार, मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा हाल ही में गिरफ्तार किए गए दो शिकारियों ने जांचकर्ताओं को बताया था कि वे इस संगठन के इशारे पर काम कर रहे थे।
हालांकि, वाइल्डलाइफ एसओएस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए उसके पास रिकॉर्ड और पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
भाषा सुमित वैभव
वैभव

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