महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं देने पर न्यायालय ने भारतीय तटरक्षक बल को फटकारा
महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं देने पर न्यायालय ने भारतीय तटरक्षक बल को फटकारा
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) द्वारा एक महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं दिए जाने पर बुधवार को कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि ‘‘हम महिला अधिकारियों का इस तरह अपमान नहीं होने देंगे।’’
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भारतीय तटरक्षक बल की मंगलवार को जारी नीति को ‘‘अस्पष्ट’’ और ‘‘मनमाना’’ बताते हुए आईसीजी को दो सप्ताह का समय दिया कि वह अधिकारी प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने पर फैसला करे, अन्यथा अदालत उनके समायोजन के आदेश पारित करेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘नीति अस्पष्ट है और मनमानी प्रतीत होती है। पूरा प्रयास इनकार करने का है। कल आप कहेंगे कि लंबाई सही नहीं है और वजन उपयुक्त नहीं है।’’
अदालत ने कहा कि अत्यधिक तकनीकी आपत्तियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
पीठ ने कहा, ‘‘अगर आप पुरुषों को स्थायी कमीशन दे सकते हैं तो महिला अधिकारियों को क्यों नहीं? हम महिला अधिकारियों का इस तरह अपमान नहीं होने देंगे।’’
पीठ ने आईसीजी की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि से कहा कि अदालत बल को दो सप्ताह का समय दे रही है ताकि वह इस मामले में फैसला ले सके और इसके बाद अदालत उचित आदेश जारी करेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘अगर आप दो सप्ताह में ऐसा कर सकते हैं तो ठीक है, अन्यथा हम उनके समायोजन के आदेश पारित करेंगे।’’
अदालत ने त्यागी की स्थायी कमीशन अधिकारी के रूप में नियुक्ति संबंधी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा।
चौदह साल से अधिक समय तक सेवा दे चुकीं ‘शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट’ (एसएसए) अधिकारी प्रियंका त्यागी ने अधिकारियों द्वारा स्थायी कमीशन देने से इनकार किए जाने और सेवा से मुक्त किए जाने के निर्देश के बाद उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
शीर्ष अदालत ने 2024 में आईसीजी को उन्हें फिर से सेवा में शामिल करने का निर्देश दिया था। त्यागी देश के पूर्वी क्षेत्र में समुद्री गश्त के लिए तैनात डोर्नियर विमान की उस चालक दल का हिस्सा थीं जिनमें सभी महिलाएं थीं। त्यागी विमान की कप्तान के रूप में जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।
अधिकारी की ओर से पेश अधिवक्ता सिद्धांत शर्मा ने कहा कि आईसीजी ने मंगलवार को स्थायी कमीशन देने संबंधी नीति जारी की, लेकिन वह बेहद अस्पष्ट और मनमानी है। अधिकारी ने बुधवार को अंडमान और निकोबार स्थित इकाई में कार्यभार संभाल लिया है।
शर्मा ने दावा किया कि याचिकाकर्ता के पास पुरुष और महिला अधिकारियों समेत सभी बलों में अपनी वरिष्ठता के अनुसार सबसे अधिक उड़ान घंटे हैं। शर्मा ने दावा किया कि उन्होंने डोर्नियर विमान से करीब 4,500 घंटे उड़ान भरी है और समुद्र में 300 से अधिक लोगों की जान बचाई है।
प्रधान न्यायाधीश ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि जब अधिकारी लगातार 14 वर्षों से आईसीजी में सेवा दे रही हैं तो उन्हें स्थायी कमीशन देने से कैसे इनकार किया जा सकता है।
अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि आईसीजी के इतिहास और उसकी कुछ सीमाओं को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि नौसेना की तरह तटरक्षक बल में महिला अधिकारियों के लिए लंबे समय से बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘आप नाव में यात्रा नहीं कर सकते। हम सभी के लिए रातोंरात पद नहीं बना सकते। बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण है। अगर वह नहीं है तो महिला अधिकारियों को कैसे शामिल किया जा सकता है।’’
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि महिला अधिकारियों के लिए कुछ विशेष सुविधाओं की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक पोत खरीदे जा रहे हैं और सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने फिर सवाल किया कि जब पुरुष अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया है तो महिला अधिकारियों को क्यों नहीं दिया जा सकता।
पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा, ‘‘आप अपनी ही निष्क्रियता का लाभ नहीं उठा सकते। ये अत्यधिक तकनीकी आपत्तियां काम नहीं करेंगी।’’
अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘इसे लैंगिक मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बुनियादी ढांचे का विकास कई पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाना है और यह मनमाने तरीके से इनकार करने का मामला नहीं है। यह लैंगिक असंवेदनशीलता का मामला नहीं है।’’
पीठ ने मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी।
इससे पहले आठ अप्रैल, 2024 को शीर्ष अदालत ने कहा था कि न्यायपालिका को ‘‘ध्वजवाहक’’ बनकर देश के साथ आगे बढ़ना होगा। अदालत ने त्यागी के साथ किए गए व्यवहार को लेकर आईसीजी को फटकार लगाई थी और उन्हें फिर से सेवा में शामिल करने का आदेश दिया था।
भाषा अमित शफीक
शफीक

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