ओडिशा के लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन ‘पखाला भात’ के लिए रास में जीआई टैग की उठी मांग
ओडिशा के लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन ‘पखाला भात’ के लिए रास में जीआई टैग की उठी मांग
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) ओडिशा के पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजन ‘पखाला भात’ को अब तक आधिकारिक रूप से भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग नहीं मिलने का मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया और सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।
शून्यकाल में बीजू जनता दल (बीजद) की सांसद सुलता देव ने पखाला भात की विशिष्टता और ओडिशा की परंपरा में इसके महत्व को रेखांकित करते हुए इस व्यंजन को जीआई टैग दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पखाला भात केवल एक भोजन नहीं, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।
पखाला भात ओडिशा का एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक भोजन है, जिसे आमतौर पर पके हुए चावल को पानी में भिगोकर तैयार किया जाता है। गर्मी के मौसम में इसे शरीर को ठंडक देने वाले भोजन के रूप में विशेष पसंद किया जाता है। इसे अक्सर दही, नींबू, हरी मिर्च, प्याज, भुनी हुई सब्जियों और मछली या अन्य स्थानीय व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।
ओडिशा में हर साल 20 मार्च को ‘पखाला दिवस’ भी मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस पारंपरिक व्यंजन को बढ़ावा देना और नयी पीढ़ी को इसकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी विशिष्ट भौगोलिक पहचान और गुणवत्ता के आधार पर मिलने वाली कानूनी मान्यता है। यह टैग किसी क्षेत्र विशेष की कला, कृषि उत्पाद या खाद्य पदार्थों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करता है।
ओडिशा के कई उत्पादों को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें रसगुल्ला, कोणार्क की पत्थर नक्काशी, कटक की तारकशी और कई पारंपरिक हस्तशिल्प शामिल हैं। ऐसे में पखाला भात को भी जीआई टैग दिलाने की मांग राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।
भाषा मनीषा माधव
माधव

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