जेईई-एडवांस्ड में तीन प्रयास की मांग तेज, हजारों अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्रालय को दिया प्रतिवेदन

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जेईई-एडवांस्ड में तीन प्रयास की मांग तेज, हजारों अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्रालय को दिया प्रतिवेदन

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  • Publish Date - September 1, 2026 / 06:44 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 06:44 PM IST

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) देशभर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्र मांग कर रहे हैं कि प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश का रास्ता मानी जाने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)-एडवांस्ड में शामिल होने के अवसरों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन की जाए।

फिलहाल अभ्यर्थियों को लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार जेईई-एडवांस्ड देने की अनुमति है। पहला प्रयास 12वीं कक्षा पास करने वाले वर्ष में और दूसरा प्रयास उसके अगले लगातार वर्ष में किया जा सकता है।

बारह हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी परिषद और संयुक्त प्रवेश बोर्ड (जेएबी) से मांग की है कि जेईई-एडवांस्ड में शामिल होने के अवसरों की संख्या बढ़ाकर तीन की जाए या फिर दो प्रयासों की अनुमति तीन लगातार वर्षों में दी जाए।

जेईई-मेन में सबसे अधिक अंक पाने वाले 2.5 लाख अभ्यर्थियों को जेईई-एडवांस्ड में बैठने का मौका मिलता है। छात्रों को 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले वर्ष से शुरू होकर लगातार तीन वर्षों में जेईई-मेन में छह बार बैठने की अनुमति है।

वहीं, एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए एकमात्र प्रवेश परीक्षा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में अभ्यर्थियों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है और वे कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं।

अभ्यर्थियों ने अपनी प्रतिवेदन में कहा, ‘‘मौजूदा व्यवस्था के तहत छात्रों को लगातार दो प्रयासों तक सीमित रखा गया है, जबकि इसी प्रवेश व्यवस्था में जेईई-मेन तीन साल में छह प्रयास का अवसर देता है। यदि जेईई-मेन में प्रदर्शन सुधारने का मौका दिया जाता है तो जेईई-एडवांस्ड में इसे सीमित क्यों किया गया है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह असंगति कई योग्य और मेहनती छात्रों को अपनी वास्तविक क्षमता दिखाने का उचित अवसर नहीं देती।’’

अभ्यर्थियों ने कहा, ‘‘तीसरा प्रयास प्रतियोगिता बढ़ाएगा, यह धारणा गलत है। जेईई-एडवांस्ड में पहले ही जेईई-मेन के जरिए अभ्यर्थियों का चयन हो जाता है और सीट की संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा की कठिनाई और मूल्यांकन की प्रक्रिया भी वही रहेगी। अधिक प्रयास अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा नहीं करते, बल्कि सभी को उचित अवसर सुनिश्चित करते हैं।’’

आईआईटी में दाखिले के इच्छुक छात्र कई वर्षों से जेईई-एडवांस्ड में तीन प्रयास की मांग करते रहे हैं। हालांकि, छात्रों के बेहतर मानसिक स्थिति को लेकर जारी चर्चा के बीच इस मांग ने अब जोर पकड़ लिया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान जेईई-एडवांस्ड में एक अतिरिक्त प्रयास की अनुमति दी गई थी।

प्रतिवेदन में कहा गया, ‘‘कोविड के दौरान उठाए गए कदम से साबित हुआ कि जरूरत पड़ने पर निष्पक्षता के लिए व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। अतिरिक्त प्रयास से परीक्षा की गुणवत्ता कम नहीं होती, बल्कि अधिक योग्य छात्रों को वह अवसर मिलता है जिसके वे हकदार हैं।’’

प्रतिवेदन में कहा गया, ‘‘यह एक अनावश्यक सीमा हटाने और समान अवसर सुनिश्चित करने का अनुरोध है। एक निष्पक्ष व्यवस्था में छात्रों की वास्तविक क्षमता का आकलन होना चाहिए, न कि उन्हें तय समय-सीमा से बांधना चाहिए। प्रतिभा को प्रयासों की संख्या तक सीमित न करें। योग्यता का आकलन उसके सर्वोच्च स्तर पर होने दें।’’

अभ्यर्थियों ने कहा कि जेईई-एडवांस्ड में विषयों की गहरी समझ, विश्लेषणात्मक सोच और समस्याओं को हल करने की क्षमता की परीक्षा होती है। उन्होंने कहा कि कई छात्र लगातार तैयारी के बाद ही अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के स्तर तक पहुंच पाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जेईई-एडवांस्ड एक दिन में होने वाली बेहद दबावपूर्ण परीक्षा है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, चिंता या छोटी-सी गलती भी प्रदर्शन को काफी प्रभावित कर सकती है। दो प्रयास किसी छात्र की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह नहीं दर्शा सकते।’’

अभ्यर्थियों ने कहा कि सभी छात्रों को शुरुआत से समान जानकारी, मार्गदर्शन या संसाधन उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने कहा कि ग्रामीण या वंचित पृष्ठभूमि के कई छात्र 12वीं कक्षा के बाद ही गंभीर तैयारी शुरू करते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है।

उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों को शुरुआती दौर से ही व्यवस्थित तैयारी की सुविधा मिलती है, जबकि अन्य छात्र काफी देर से शुरुआत करते हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, तीसरा प्रयास इस अंतर को कम करने और सभी को समान अवसर देने में मदद कर सकता है।

भाषा अमित माधव

माधव