चेन्नई, 23 सितंबर (भाषा) तमिलनाडु के सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु ने कहा है कि छात्रों के कुछ समूहों ने सरकारी छात्रावासों के मेन्यू में बीफ (गोमांस) शामिल करने का अनुरोध किया है और इस संबंध में कोई भी फैसला लेने से पहले अधिकारियों के साथ चर्चा की जाएगी।
शहर के सैदापेट स्थित एम. सी. राजा सामाजिक न्याय छात्रावास में सुविधाओं की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मंत्री अरासु ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले कई छात्रों ने मौजूदा मांसाहारी विकल्पों के साथ बीफ को भी शामिल करने की मांग की है।
मंत्री ने बताया, ‘‘वर्तमान में सरकारी छात्रावासों में मटन और चिकन परोसा जाता है और सोमवार को बिरयानी दी जाती है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों के एक वर्ग ने ध्यान आकर्षित किया है कि मटन अपेक्षाकृत काफी महंगा है, जिसका वे (आमतौर पर घर पर) सेवन नहीं करते थे। इसलिए उन्होंने मेन्यू में बीफ जोड़ने का अनुरोध किया है।’’
मंत्री ने स्पष्ट किया कि चूंकि छात्रावास के छात्रों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है, इसलिए संबंधित अधिकारियों के साथ परामर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विभाग पहले से ही छात्रों के फीडबैक के आधार पर छात्रावासों के मेन्यू में एक-एक कर सुधार कर रहा है, जिसके तहत उपमा और सेवईं खिचड़ी जैसे नापसंद किए जाने वाले व्यंजनों की जगह इडली और डोसा जैसे लोकप्रिय नाश्ते शामिल किए गए हैं।
इस बीच, पुथिया तमिलगम के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. के. कृष्णसामी ने हॉस्टल मेन्यू में बीफ को शामिल करने की संभावना वाले मंत्री के इस बयान की कड़ी निंदा की है। कृष्णसामी ने ऐसा कोई भी निर्णय लेने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि इसके ‘‘गंभीर परिणाम’’ हो सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि छात्रावास के छात्रों के आहार में प्रोटीन और आवश्यक विटामिन सहित संतुलित पोषण की आवश्यकता होती है। पीटी नेता ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए मंत्री से अपना बयान तुरंत वापस लेने की मांग की है।
भाषा मनीषा रंजन
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