‘डिजिटल गिरफ्तारी’ : बेंगलुरु पुलिस ने कहा कि साइबर ठगों ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया

‘डिजिटल गिरफ्तारी’ : बेंगलुरु पुलिस ने कहा कि साइबर ठगों ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया

‘डिजिटल गिरफ्तारी’ : बेंगलुरु पुलिस ने कहा कि साइबर ठगों ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया
Modified Date: October 14, 2025 / 05:10 pm IST
Published Date: October 14, 2025 5:10 pm IST

बेंगलुरु, 14 अक्टूबर (भाषा) बेंगलुरु में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए साइबर ठगों ने ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ के जरिए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार, सात अक्टूबर को एक फर्जी बीपीओ का भंडाफोड़ किया गया और 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने बताया, ‘‘साइबर अपराध करने के उद्देश्य से एक फर्जी बीपीओ कंपनी ‘साइबिट्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से स्थापित की गई थी। नौकरी के बहाने लगभग 20 से 25 युवक-युवतियों को ऑनलाइन भर्ती किया गया था और उन्हें ऑनलाइन माध्यम से साइबर धोखाधड़ी का प्रशिक्षण दिया जा रहा था।’’

पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य अज्ञात व्यक्तियों की व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन एकत्र करते थे, उनसे फोन पर संपर्क करते थे और उन्हें यह कहकर धमकाते थे कि उनके खिलाफ मादक पदार्थ कानून और धन शोधन अपराधों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

पुलिस ने कहा, ‘‘जांच या पुलिस एजेंसियों के अधिकारी होने का नाटक करते हुए उन्होंने निर्दोष लोगों को धमकाया और ‘मदद’ की पेशकश की आड़ में उन्हें ऑनलाइन पैसे देने का लालच दिया, जिससे उन्हें अवैध लाभ हुआ।’’

जांच दल ने उस जगह पर छापा मारा और वहां काम करने वाले लोगों से पूछताछ की। ‘‘कर्मचारियों’’ ने खुलासा किया कि उन्होंने ‘वर्कइंडिया’ और ‘लिंक्डइन’ जैसे प्लेटफॉर्म और रोजगार के अवसर प्रदान करने वाली वेबसाइटों पर नौकरी की जानकारी अपलोड की थी।

बाद में कंपनी के प्रबंधकों और पर्यवेक्षकों ने विभिन्न राज्यों से नौकरी चाहने वालों को कॉल सेंटर में नौकरी और आवास का लालच देकर बेंगलुरु बुलाया और दावा किया कि वे अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों में ऑनलाइन सूचना सेवाएं प्रदान करते हैं।

तीन सप्ताह के टेलीकॉलर प्रशिक्षण के बाद कर्मचारियों को अमेरिकी सीमा सुरक्षा बल, अमेरिकी डाक सेवाओं और अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा बल के बारे में सिखाया गया।

पुलिस ने कहा, ‘‘कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए लाइव सर्वर का इस्तेमाल करके उन्होंने लोगों (ज्यादातर अमेरिकियों) को फ़ोन किया और उन्हें यह कहकर धमकाया कि वे मादक पदार्थ की तस्करी या धन शोधन के मामलों में शामिल हैं। उन्हें फर्जी गिरफ्तारी वारंट और फर्जी पुलिस आईडी दिखाई गईं और उनकी ‘रिहाई’ के लिए पैसे की मांग की गई। इसे डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला कहा जाता है।’’

पुलिस ने 41 कंप्यूटर सिस्टम जब्त किए। इस सिलसिले में 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

भाषा गोला मनीषा

मनीषा


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