लंबे समय तक पढ़ने से अधिक महत्वपूर्ण है अनुशासन और निरंतरता: सीयूईटी टॉपर देविना गहलोत

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लंबे समय तक पढ़ने से अधिक महत्वपूर्ण है अनुशासन और निरंतरता: सीयूईटी टॉपर देविना गहलोत

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 12:40 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 12:40 PM IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली देविना गहलोत ने कहा है कि जब उन्होंने पहली बार अपना परिणाम देखा तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने अपना आवेदन क्रमांक दोबारा जांचा।

बिजवासन से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कैलाश गहलोत की बेटी देविना ने कहा, ‘‘मैं बार-बार आवेदन क्रमांक देख रही थी क्योंकि मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैंने पूरे देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है।’’

उन्होंने कहा कि उन्हें परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने का भरोसा था लेकिन उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान हासिल करने की उम्मीद नहीं की थी।

देविना ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और शिक्षकों को देते हुए कहा कि उन्होंने उन पर कभी किसी तरह का दबाव नहीं डाला।

तैयारी की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर देविना ने कहा कि लंबे समय तक पढ़ाई करने से अधिक महत्वपूर्ण अनुशासन और निरंतरता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं हर दिन प्रत्येक विषय पढ़ती थी। मैंने केवल किसी एक विषय पर ध्यान केंद्रित नहीं किया। मैं पाठ्यक्रम को नियमित रूप से दोहराती थी और मैंने पिछले वर्षों के बहुत से प्रश्नपत्र हल किए।’’

देविना ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं के बाद तैयारी का शुरुआती दौर चुनौतीपूर्ण था।

उन्होंने कहा, ‘‘बोर्ड परीक्षाओं के तुरंत बाद जब मैंने सीयूईटी की तैयारी शुरू की तो मुझे पता ही नहीं था कि क्या पढ़ना है और कहां से पढ़ना है। कभी-कभी मुझे लगता था कि शायद मैं यह कर नहीं पाऊंगी क्योंकि मैं ऐसे दबाव की आदी नहीं थी जो मेरा भविष्य तय कर सकता था।’’

देविना ने कहा कि उस अनिश्चितता से निकलने में उनके माता-पिता के प्रोत्साहन ने उनकी मदद की।

वह अब अंग्रेजी ऑनर्स की पढ़ाई करना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरी साहित्य, पढ़ने और लिखने में बहुत रुचि है इसलिए मैंने अंग्रेजी ऑनर्स करने का विचार किया है। इसके बाद शायद पत्रकारिता करूं। अभी कोई ठोस योजना नहीं है लेकिन फिलहाल मैं इसी दिशा में सोच रही हूं।’’

देविना ने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए राजनीति में आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बचपन से ही अपने पिता को विधायक और मंत्री के रूप में देखा है। मैंने देखा है कि इस पेशे के माध्यम से कितने लोगों की मदद हुई। मैं उन्हें दूसरों के लिए काम करते और उनकी मदद करते देखकर बड़ी हुई हूं इसलिए मेरी इसमें रुचि है लेकिन देखते हैं कि जिंदगी मुझे कहां ले जाती है।’’

कैलाश गहलोत ने कहा कि उनकी बेटी की उपलब्धि से पूरा परिवार बहुत खुश है। उन्होंने इसका श्रेय देविना की मेहनत के साथ-साथ उनकी मां, शिक्षकों और स्कूल के सहयोग को दिया।

पूर्व परिवहन मंत्री ने कहा, ‘‘हम सभी बहुत खुश हैं। माता-पिता के रूप में हमने उस पर कभी दबाव नहीं डाला। हमारी दोनों बेटियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। मैं अक्सर उससे पूछता था कि वह गंभीरता से पढ़ाई कर रही है या नहीं और उसका जवाब हमेशा यही होता था, ‘पापा, हो जाएगा’।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल उसकी मेहनत का परिणाम है। मेरी पत्नी ने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई और उसके शिक्षकों एवं दिल्ली पब्लिक स्कूल, वसंत कुंज ने भी पूरा सहयोग दिया।’’

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने मंगलवार को सीयूईटी-यूजी के परिणाम घोषित किए थे।

एजेंसी ने बताया कि कुल 22 अभ्यर्थियों ने अपने चुने हुए तीन विषयों में 100 परसेंटाइल हासिल किए, जबकि 180 उम्मीदवारों ने दो विषयों में 100 परसेंटाइल हासिल किए।

परसेंटाइल एक सांख्यिकीय माप है जो यह दर्शाता है कि किसी परीक्षा या मूल्यांकन में अभ्यर्थी का प्रदर्शन अन्य लोगों की तुलना में कैसा रहा है। यह अभ्यर्थी के कुल अंक (प्रतिशत) नहीं बताता, बल्कि यह बताता है कि कितने प्रतिशत परीक्षार्थियों ने अभ्यर्थी से कम या उसके बराबर अंक प्राप्त किए हैं।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा