कोच्चि, 24 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को कानून में निर्धारित तरीके से ही शपथ लेनी होगी। अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई पार्षदों द्वारा ली गई उन शपथों को अमान्य करार दिया, जिनमें उन्होंने ‘ईश्वर’ या ‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’ के बजाय अन्य नामों का उल्लेख किया था।
न्यायमूर्ति पी. वी. कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि केरल नगर पालिका अधिनियम और केरल पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्वाचित सदस्यों को शपथ या तो ‘‘ईश्वर के नाम पर’’ या ‘‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’’ के साथ लेनी होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शपथ लेते समय किसी विशेष देवी-देवता, ‘‘भारत माता’’, किसी राजनीतिक आंदोलन के शहीदों, संगठन या व्यक्ति का नाम शामिल करने की अनुमति इन कानूनों में नहीं है।
यह मामला तब सामने आया, जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं, ‘भारतंबा’, ‘भारत माता’, गुरुदेव और राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम पर शपथ ली थी।
एक अलग याचिका में पलक्कड़ जिले की वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत के एक सदस्य ने ‘‘ईश्वर की कृपा से ओमन चांडी के नाम पर’’ शपथ ली थी।
अदालत ने कहा कि शपथ लेना मतदाताओं के प्रति एक गंभीर वचन है कि निर्वाचित प्रतिनिधि संविधान का सम्मान करेगा, कानून के शासन का पालन करेगा और ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा; इसलिए शपथ ठीक उसी रूप में दिलाई जानी चाहिए, जैसा कानून में निर्धारित है।
न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को किसी भी देवी-देवता की पूजा करने या किसी भी धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन कानून में निर्धारित शपथ के प्रारूप में किसी प्रकार का जोड़ या बदलाव स्वीकार्य नहीं है।
फैसले में कहा गया, “जब किसी कानून में शपथ लेने का एक विशेष तरीका निर्धारित किया गया हो… तब ‘ईश्वर’ शब्द का विस्तार करना स्वीकार्य नहीं है।”
हालांकि, अदालत ने निर्वाचित प्रतिनिधियों के जनादेश को प्रभावित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शपथ लेने की प्रक्रिया में त्रुटि होने के बावजूद उनका निर्वाचन वैध बना रहेगा।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन पार्षदों और ग्राम पंचायत सदस्य के लिए चार सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप दोबारा शपथ दिलाने की व्यवस्था की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने सद्भावनापूर्वक यह मानकर शपथ ली थी कि उनका तरीका कानूनी रूप से वैध है।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षदों के मामले में अदालत ने कहा कि उनकी शपथ भले ही कानून के अनुरूप नहीं थी, लेकिन केरल नगर पालिका अधिनियम की धारा 531 के तहत अब तक उनके द्वारा किए गए कार्य वैध माने जाएंगे।
हालांकि, वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य के मामले में अदालत ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम में ऐसी कोई समान संरक्षण संबंधी व्यवस्था नहीं है।
इसलिए अदालत ने माना कि उस सदस्य द्वारा अब तक किए गए कार्य अमान्य हैं, हालांकि उसे दोबारा शपथ लेने का अवसर दिया गया है।
अपने आदेश में न्यायाधीश ने श्री नारायण गुरु की शिक्षाओं और संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का भी उल्लेख किया।
अदालत ने कहा कि लोग ईश्वर को अलग-अलग नामों से पुकार सकते हैं, लेकिन कानून केवल यह अपेक्षा करता है कि बिना किसी अतिरिक्त विस्तार के शपथ ‘‘सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान’’ या ‘‘ईश्वर के नाम पर’’ ली जाए ।
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खारी वैभव
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