सरकारी नौकरी के आवेदनों में पूर्ण जानकारी देना निष्पक्षता पर आधारित बुनियादी आवश्यकता है :न्यायालय

सरकारी नौकरी के आवेदनों में पूर्ण जानकारी देना निष्पक्षता पर आधारित बुनियादी आवश्यकता है :न्यायालय

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  • Publish Date - January 12, 2026 / 08:51 PM IST,
    Updated On - January 12, 2026 / 08:51 PM IST

नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि सरकारी नौकरी के लिए आवेदनों में उचित एवं पूर्ण जानकारी देना कोई साधारण प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं बल्कि निष्पक्षता, ईमानदारी एवं जनविश्वास में निहित एक बुनियादी आवश्यकता है।

ये टिप्पणियां न्यायमूर्ति संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने की और उसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के मई 2025 के आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि की थी, जिसमें ‘सहायक समीक्षा अधिकारी’ के रूप में अपनी नियुक्ति रद्द किए जाने को चुनौती देने वाले व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया गया था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्राधिकरण ने उस व्यक्ति की नियुक्ति इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उसने संबंधित समय पर उसके खिलाफ दो आपराधिक कार्यवाहियों के लंबित होने की जानकारी छिपाई थी।

पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए कहा, ‘‘यह कानून में सर्वमान्य रुख है कि सहानुभूति कानून का स्थान नहीं ले सकती। हम मानते हैं कि सरकारी नौकरी खोना एक ऐसा नुकसान है जिसे स्वीकार करना आसान नहीं है, फिर भी इसके परिणामों के प्रति जागरूकता कार्रवाई का एक आवश्यक घटक है।’’

उसने कहा कि सरकारी पदों के लिए सैकड़ों और अक्सर हजारों आवेदक आवेदन करते हैं जिनमें से प्रत्येक समान शर्तों के तहत प्रतिस्पर्धा करता है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने एवं चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए प्रत्येक उम्मीदवार की सावधानीपूर्वक जांच करना अनिवार्य एवं आवश्यक हो जाता है।

पीठ ने टिप्पणी की कि जब कोई आवेदक आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी छुपाता है तो वह नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी को पूरी जानकारी के आधार पर उपयुक्तता का मूल्यांकन करने के अवसर से वंचित करके इस प्रक्रिया को कमजोर करता है।

पीठ ने कहा, ‘‘सरकारी रोजगार के आवेदनों में उचित और पूर्ण जानकारी देना कोई साधारण प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि निष्पक्षता, ईमानदारी और जनविश्वास में निहित एक बुनियादी आवश्यकता है।’’

भाषा सिम्मी अविनाश

अविनाश