सतर्कता विभाग की कार्रवाई के विरोध में सितारगंज तहसील में शुरू हुआ विवाद 20 घंटे बाद समाप्त

सतर्कता विभाग की कार्रवाई के विरोध में सितारगंज तहसील में शुरू हुआ विवाद 20 घंटे बाद समाप्त

सतर्कता विभाग की कार्रवाई के विरोध में सितारगंज तहसील में शुरू हुआ विवाद 20 घंटे बाद समाप्त
Modified Date: July 30, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: July 30, 2026 5:34 pm IST

सितारगंज (उत्तराखंड), 30 जुलाई (भाषा) उत्तराखंड में उधमसिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में सतर्कता विभाग की कार्रवाई के विरोध में कर्मचारियों के लामबंद होने से शुरू हुआ विवाद करीब 20 घंटे के बाद बृहस्पतिवार को समाप्त हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन के उच्चाधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी जिसके बाद राजस्वकर्मियों ने धरना समाप्त करने के साथ ही अपना अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार वापस ले लिया।

सितारगंज के उप जिलाधिकारी तुषार सैनी ने बताया कि सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकाल लिया गया है और तहसील कार्यालय में फिर से नियमित कामकाज शुरू हो गया है।

सतर्कता विभाग की टीम ने बुधवार को एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सितारगंज तहसील में तैनात संग्रह अमीन मदन लाल शर्मा को आठ हजार रुपए तथा वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा को छह हजार रुपए की कथित रूप से रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।

हालांकि, इसकी खबर फैलते ही तहसील परिसर में बड़ी संख्या में राजस्व कर्मचारी इकट्ठा हो गए और धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए तत्काल प्रभाव से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी और तहसील कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया।

उधमसिंह नगर जिले के संग्रह अमीन संघ के जिलाध्यक्ष उमाशंकर ने आरोप लगाया कि शर्मा और राणा द्वारा नियत प्रावधानों के अनुसार बकायेदार से धनराशि ली जा रही थी और उसकी रसीद जारी की जा रही थी लेकिन इसी दौरान सतर्कता विभाग के अधिकारियों द्वारा हस्तक्षेप करते हुए वसूली की धनराशि को गलत तरीके से रिश्वत बताते हुए उन्हें पकड़ लिया गया।

उमाशंकर ने सतर्कता विभाग पर बिना तथ्यों, साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच के व्यक्ति विशेष और राजस्व विभाग की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच करने तथा उसके पूरे होने तक संबंधित कर्मचारियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई न किए जाने की मांग की।

कर्मचारियों के धरने और कार्यबहिष्कार के चलते तहसील में कामकाज ठप हो गया और नामांतरण, आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल और भूमि संबंधी सभी राजस्व सेवाएं प्रभावित रहीं। दूर-दराज से पहुंचे लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

गतिरोध को खत्म कराने के लिए बुधवार देर रात से लेकर बृहस्पतिवार अपराह्न तक प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच कई दौर की वार्ता हुई जिसके बाद अधिकारियों द्वारा जांच होने तक पकड़े गए कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न किए जाने का आश्वासन दिए जाने पर कर्मचारियों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।

समझौता होने पर करीब 20 घंटे बाद तहसील कार्यालय का ताला खोला गया तथा अधिकारियों और कर्मचारी ने अपने-अपने कार्यालयों में लौटकर कामकाज शुरू किया।

भाषा सं दीप्ति शफीक

शफीक


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