Divya Mittal Political Party: पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने किया राजनीति में एंट्री लेने का ऐलान, कुछ ही दिन पहले दिया था पद से इस्तीफा, किस पार्टी में होंगी शामिल? / Image: Viral Video
लखनऊ: Divya Mittal Political Party उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अफसर दिव्या मित्तल ने आखिरकार सभी कयासों को विराम देते हुए राजनीति में एंट्री करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए पॉलिटिकल करियर शुरूआत करने की घोषणा की है। उन्होंने अपने वीडियो में हिा है कि यूपी में ही रहूंगी। डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी। मुझे बाहुबल नहीं चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने अपना नंबर जारी करते हुए कहा है कि आप मेरा साथ दीजिए। बता दें कि हाल ही में दिव्या मित्तल ने वीआरएस ले लिया था।
दिव्या मित्तल ने कहा कि कुछ दिन पहले आईएएस से इस्तीफा देने के बाद उनके सामने कई सवाल थे। लोग जानना चाहते थे कि आगे क्या करेंगी, किसके साथ जाएंगी और कहां से शुरुआत करेंगी। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब देने में उन्हें कुछ समय लगा, क्योंकि वह खुद भी इस नए रास्ते के लिए तैयारी कर रही थीं। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफे की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने अपने फैसले के पीछे निजी और पारिवारिक कारणों का उल्लेख किया था। उनका इस्तीफा 15 सितंबर से प्रभावी हुआ।
दिव्या मित्तल ने कहा कि उत्तर प्रदेश उनके लिए सिर्फ एक कार्यस्थल नहीं रहा, बल्कि यहां के लोगों ने उन्हें परिवार का हिस्सा माना। उन्होंने कहा कि वह एक अधिकारी के तौर पर उत्तर प्रदेश आई थीं, लेकिन यहां के लोगों ने उन्हें बेटी की तरह अपनाया। इसी वजह से वह अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी उत्तर प्रदेश से करना चाहती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के इतिहास और सामाजिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रदेश ने कई मौकों पर देश को दिशा दी है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे किसी एक व्यक्ति को मसीहा मानकर इंतजार न करें। उनके मुताबिक, बदलाव की शुरुआत लोगों को खुद करनी होगी।
दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके लिए राजनीति किसी पद तक पहुंचने का माध्यम नहीं होगी। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती और पहुंचने के बाद भी कई बार सुनी नहीं जाती। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी कई बुनियादी समस्याएं मौजूद हैं और वह इन समस्याओं का जवाब चाहती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के कई अनुभवों का जिक्र किया। सबसे पहले उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह इलाके की एक महिला से हुई मुलाकात का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, वह पहाड़ी इलाके में पानी पहुंचाने के काम का निरीक्षण कर रही थीं। इसी दौरान एक महिला उनके पास आई और उसने अपनी समस्या बताई। दिव्या मित्तल के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि महिला पेंशन, आवास या पानी जैसी किसी सुविधा की मांग करेगी, लेकिन महिला ने गांव में स्कूल की अगली कक्षा शुरू कराने की मांग की। महिला ने बताया कि गांव में स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक है और उसके बाद बच्चों की पढ़ाई आगे जारी रखने में बड़ी परेशानी होती है। दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्होंने स्कूल से जुड़े नियमों और स्वीकृति की प्रक्रिया को देखा। उनके मुताबिक, स्कूल को मंजूरी भी मिली, लेकिन तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम और स्वीकृति मौजूद थे तो काम क्यों नहीं हुआ। उनके शब्दों में, समस्या संसाधनों की नहीं बल्कि इरादे की थी।
दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का एक और मामला साझा किया। उन्होंने बताया कि विशेष सचिव राजस्व रहते हुए एक व्यक्ति उनसे मिला था। उसके पास सरकारी जमीन के पट्टे से जुड़े दस्तावेज एक पन्नी में रखे थे। उनके मुताबिक, व्यक्ति को जमीन का पट्टा तो मिल गया था, लेकिन वास्तविक कब्जा नहीं मिला। उन्होंने दस्तावेजों की जांच कराई तो संबंधित रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई। दिव्या मित्तल ने कहा कि संबंधित अधिकारी से बात करने के बाद रिपोर्ट वापस कराई गई और रिपोर्ट तैयार करने वाले के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। इसके बाद मामला जमीन पर कब्जा दिलाने का था। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से बात करने के बावजूद उन्हें यह जवाब मिला कि ‘ऊपर से मना किया गया है।’ इसी बात को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ‘ऊपर’ कौन है। उन्होंने कहा कि संविधान में जनता को सर्वोच्च माना गया है, इसलिए किसी व्यक्ति को अपने अधिकार के लिए सिफारिश और फोन का सहारा क्यों लेना पड़े।
Divya Mittal Political Party हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से BTech और IIM बेंगलुरु से MBA किया है। MBA के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की, लेकिन बाद में भारत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की। (IAS Divya Mittal to Contest Elections?) 2012 में अपने पहले प्रयास में उन्होंने IPS के लिए सफलता हासिल की थी। इसके बाद 2013 में दूसरे प्रयास में 68वीं रैंक हासिल कर IAS ज्वाइन किया।
दिव्या मित्तल ने संत कबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया जिलों में जिलाधिकारी के रूप में काम किया। मिर्जापुर में डीएम रहते हुए उन्होंने हलिया ब्लॉक के दूरदराज के पहाड़ी गांव लहुरियादह में पेयजल पहुंचाने की पहल की थी। आजादी के करीब 75 साल बाद गांव में पहली बार पाइप से पानी पहुंचा था। देवरिया में भी उनके कार्यकाल को सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और प्रशासनिक फैसलों के लिए याद किया जाता है।
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दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में कहा कि जरूरतमंद परिवारों, दिव्यांग लोगों और किसानों के साथ काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों को याद करते हुए लिखा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है। (IAS Divya Mittal to Contest Elections?) वहीं मिर्जापुर ने उन्हें सिखाया कि असंभव कोई तथ्य नहीं, बल्कि केवल एक राय है। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार को अभी तक उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हुआ है। इस्तीफा मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।