गर्मी के मौसम में आंखों का पानी न सूखे : चिकित्सकों की सलाह
गर्मी के मौसम में आंखों का पानी न सूखे : चिकित्सकों की सलाह
(प्रचेता चौहान)
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत पूरे उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के मद्देनजर चिकित्सकों ने कम्प्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को हर 20 मिनट में 20 सेकेंड के लिए 20 फुट दूर देखने, बार-बार पलक झपकाने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है ताकि आंखों की नमी बनी रहे।
चिकित्सकों का कहना है कि पिछले करीब एक पखवाड़े में आंखों में जलन, लालिमा और एलर्जी के मामलों में तकरीबन 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. महिपाल सिंह सचदेवा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,’जब हम मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करते हैं, तो हमारी पलक झपकाने की दर सामान्य से काफी कम हो जाती है। आमतौर पर एक व्यक्ति प्रति मिनट 15-20 बार पलक झपकाता है, लेकिन स्क्रीन देखते समय यह घटकर छह से आठ बार रह जाता है। पलक कम झपकाने से आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की परत तेजी से सूखने लगती है, जिससे आंखों में सूखापन, खुजली और जलन जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।’
उन्होंने कहा कि लू के दौरान वातावरण में नमी कम हो जाती है और जब गर्म, शुष्क हवाएं चलती हैं तो यह स्थिति आंखों की नमी को और तेजी से खत्म करती है।
डा. सचदेवा ने कहा, “इसके अलावा, एयर कंडीशनर (एसी) का लगातार उपयोग भी कमरे की नमी को कम कर देता है जो आंखों को और सूखा बनाता है।”
उनके मुताबिक, कम्प्यूटर पर काम करने वाले हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फुट दूर देखें और बार-बार पलक झपकाएं और ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं जिससे आंखों की नमी बनी रहे।
कम्प्लीट आई केयर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पारुल सोनी ने कहा कि ऐसे मौसम में गर्मी और धूल के कारण आंखों में संक्रमण (कंजंक्टिवाइटिस, आई फ्लू) के मामले भी बढ़ सकते हैं।
उनका कहना था कि लगातार पैराबैंगनी (यूवी) किरणों के संपर्क में आने से आंखों की सतह और रेटिना को नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए गर्मी के मौसम में आंखों को सुरक्षित रखना ज्यादा जरूरी है।
इसके अलावा डॉक्टरों ने गर्मी के मौसम में लोगों को ‘कॉन्टैक्ट लेंस’ न लगाने की सलाह भी दी। उनका कहना था कि ‘कॉन्टैक्ट लेंस’ के बजाए चश्मा लगाएं क्योंकि लू में लेंस जल्दी सूख जाते है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
भाषा
प्रचेता नरेश
नरेश

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