चेन्नई, 24 फरवरी (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने यहां चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय को निर्देश दिया है कि वह सभी अंगदाताओं को संदेह की दृष्टि से न देखे और गुर्दा रोग से पीड़ित एक मरीज के लिए प्रतिरोपण की अनुमति प्रदान करे।
न्यायमूर्ति पी. टी. आशा ने कहा कि गैर-रिश्तेदारों के बीच अंगदान का मूल्यांकन गणितीय कसौटियों पर करना या उसे संदेह की दृष्टि से देखना अव्यावहारिक होगा।
उच्च न्यायालय एक मरीज और उसके संभावित दाता द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ताओं ने चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय की प्राधिकरण समिति को अंग प्रतिरोपण की अनुमति देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
अदालत ने कहा कि अंगदाता मरीज के मौसा के भाई हैं और उन्होंने स्वेच्छा से अपना अंग दान करने की पेशकश की।
अपने हालिया आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा, “यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ करुणामय व्यक्ति परिवार के सदस्य या मित्र को नया जीवन देने के लिए निस्वार्थ भाव से अपने अंग दान करने को तैयार होते हैं। ऐसे में गैर-रिश्तेदारों के बीच हर अंगदान को संदेह की दृष्टि से देखना या उसे गणितीय मानकों पर परखना उपयुक्त नहीं है।”
पीठ ने कहा कि जीवन बचाना सर्वोपरि है।
न्यायमूर्ति आशा ने कहा कि प्राधिकरण समिति द्वारा अनुमति से इनकार करना मनमाना और आधारहीन था। उन्होंने समिति को आदेश दिया कि वह आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से तीन सप्ताह के भीतर, कानून के अनुसार प्रतिरोपण की अनुमति प्रदान करे।
भाषा मनीषा वैभव
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