Doodhwalon Ke Liye License FSSAI: अब ‘दूध वाला’ भी नियमों के दायरे में! बनवाना होगा लाइसेंस, नहीं तो… FSSAI का नया नियम लागू

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Doodhwalon Ke Liye License FSSAI: देश में दूध में मिलावट के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी दूध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

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  • Publish Date - March 14, 2026 / 09:56 AM IST,
    Updated On - March 14, 2026 / 10:22 AM IST

milkman news/ image source: FREEPIK

HIGHLIGHTS
  • दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य
  • मिलावट रोकने के लिए सख्ती
  • FSSAI ने राज्यों को निर्देश

Doodhwalon Ke Liye License FSSAI: नई दिल्ली: देश में दूध में मिलावट के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब सभी दूध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य दूध के कारोबार को व्यवस्थित करना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित व शुद्ध दूध उपलब्ध कराना है। इस संबंध में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में स्पष्ट कहा गया है कि अभियान चलाकर इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाए और बिना लाइसेंस दूध बेचने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाए। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि जो छोटे दूध उत्पादक अपना पूरा दूध अमूल, मदर डेयरी, सुधा डेयरी जैसी सहकारी डेयरी संस्थाओं को बेचते हैं, उन्हें इस नियम से छूट दी जाएगी।

Milk Adulteration India: दूध विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य

एफएसएसएआई ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे विशेष अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करें कि सभी दूध उत्पादक और विक्रेता एफएसएसएआई में पंजीकरण या लाइसेंस जरूर लें। बिना लाइसेंस दूध का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि वे इस कार्रवाई की रिपोर्ट हर 15 दिन में एफएसएसएआई को भेजें, यानी महीने में दो बार रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। एफएसएसएआई के कार्यकारी निदेशक (सीएस) डॉ. सत्येन कुमार पांडा ने बताया कि हाल के समय में कई राज्यों में दूध में मिलावट के मामले सामने आए हैं। इन्हें रोकने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन कराना जरूरी है। इसी कारण राज्यों को स्पेशल ड्राइव चलाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सभी दूध विक्रेता और उत्पादक जल्द से जल्द पंजीकरण करा लें। इसके अलावा अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि मिल्क चिलर की नियमित जांच करें, खासकर गर्मियों में ताकि दूध की गुणवत्ता खराब न हो और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो।

FSSAI Milk License Rule: मिलावटी दूध से गंभीर बीमारियां

विशेषज्ञों और चिकित्सकों के अनुसार मिलावटी दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसके सेवन से पेट दर्द, दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि लंबे समय तक मिलावटी दूध का सेवन किया जाए तो इसका असर और गंभीर हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि इससे लिवर और किडनी को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है और कई मामलों में कैंसर, हृदय रोग, एलर्जी और यहां तक कि विकलांगता जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मिलावटी दूध में अक्सर फॉर्मेलिन, यूरिया और डिटर्जेंट जैसे हानिकारक रसायन पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह होते हैं। यही वजह है कि हर साल मिलावटी दूध या उससे बने उत्पादों के सेवन से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ते हैं। सरकार का मानना है कि सख्त नियम और नियमित जांच से मिलावट पर रोक लगाई जा सकती है और लोगों को सुरक्षित दूध मिल सकेगा।

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सरकार ने क्या नया नियम लागू किया है?

दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया गया है।

यह निर्देश किस संस्था ने जारी किया?

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने।

किन लोगों को नियम से छूट मिलेगी?

जो उत्पादक पूरा दूध सहकारी डेयरियों को बेचते हैं।