विमान किराये से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

विमान किराये से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

विमान किराये से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार
Modified Date: April 30, 2026 / 05:16 pm IST
Published Date: April 30, 2026 5:16 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने देश में निजी एयरलाइनों के विमान किरायों और अन्य शुल्कों में ‘‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’’ को सुव्यवस्थित करने संबंधी नियामक दिशानिर्देशों का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर हलफनामा दाखिल नहीं करने को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र को एक अर्जी के साथ हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें शपथ पत्र दाखिल न करने की वजह और इसके लिए अतिरिक्त समय मांगने के कारणों का उल्लेख किया जाए।

पिछले साल 17 नवंबर को, शीर्ष न्यायालय ने सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। लक्ष्मीनारायणन ने नागर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले एक सशक्त और स्वतंत्र नियामक की मांग की थी।

बृहस्पतिवार को सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।

केंद्र के वकील ने पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति का हवाला दिया।

पीठ ने पूछा, ‘‘यह क्या है? हलफनामा दाखिल करने में आपको क्या दिक्कत आ रही है?’’

केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि वे नियम बनाने पर विचार कर रहे हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘आप हलफनामा दाखिल करें और सब कुछ रिकॉर्ड पर रखें। आप हलफनामा दाखिल क्यों नहीं कर सकते? केंद्र का यह क्या रुख है? हमने आपको तीन बार समय दिया है।’’

केंद्र के वकील ने हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया।

पीठ ने तीन सप्ताह का समय देने से इनकार कर दिया और कहा कि हलफनामा अगले सप्ताह दाखिल किया जाए।

न्यायालय ने कहा, ‘‘आप अपना हलफनामा दाखिल करें और जो कुछ कहना चाहते हैं कहें। आपका हलफनामा अगले शुक्रवार (8 मई) तक मिल जाना चाहिए।’’

अपने आदेश में पीठ ने कहा कि याचिका पर पिछले वर्ष 17 नवंबर को नोटिस जारी किए जाने और उसके बाद प्रतिवादियों को हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिए जाने के बावजूद, ‘‘अब तक कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।’’

पीठ ने कहा कि आज भी केंद्र सरकार के वकील ने कुछ और समय मांगा।

न्यायालय ने कहा, ‘‘हम इस अनुरोध को स्वीकार करने को इच्छुक नहीं हैं। एक उपयुक्त अर्जी, हलफनामे के साथ, जिसमें हलफनामा दाखिल न करने और समय मांगने के कारणों का उल्लेख हो, एक सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।’’

केंद्र ने 23 फरवरी को उच्चतम न्यायालय को बताया था कि नागर विमानन मंत्रालय याचिका में उठाए गए मुद्दों पर तत्परता से विचार कर रहा है।

न्यायालय ने 19 जनवरी को मामले की सुनवाई करते हुए, विमान किरायों में होने वाले ‘‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’’ में हस्तक्षेप करने की बात कही थी और त्योहारों के दौरान होने वाली अत्यधिक वृद्धि पर चिंता जताई थी।

न्यायालय ने विमानन कंपनियों द्वारा विमान किरायों में की गई अत्यधिक वृद्धि को ‘‘शोषण’’ करार दिया और केंद्र सरकार तथा नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।

पिछले साल नवंबर में, पीठ ने केंद्र सरकार, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी कर याचिका पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी थी।

याचिका में दावा किया गया था कि सभी निजी एयरलाइनों ने बिना किसी ठोस कारण के ‘इकोनॉमी’ श्रेणी के यात्रियों के लिए नि:शुल्क ‘चेक-इन’ सामान की सीमा 25 किलोग्राम से घटा कर 15 किग्रा कर दी और ऐसा कर पूर्व में टिकट के अंतर्गत आने वाली सेवा को राजस्व का एक नया स्रोत बना दिया गया।

याचिका में कहा गया है कि ‘चेक-इन’ के तहत केवल एक सामान की अनुमति देने की नयी नीति और इस सेवा का लाभ न उठाने वाले यात्रियों को किसी भी प्रकार की छूट, मुआवजा या लाभ न देना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।

याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान में, किसी भी प्राधिकरण को विमान किराये या अन्य शुल्कों की समीक्षा करने या उन पर सीमा लगाने का अधिकार नहीं है, जिसके चलते एयरलाइंस छिपे हुए शुल्कों और अप्रत्याशित मूल्य निर्धारण के माध्यम से उपभोक्ताओं का शोषण कर रही हैं।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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