एलपीजी कमी के चलते ओडिशा के भोजनालयों ने मेन्यू में कटौती; कोयला व लकड़ी का इस्तेमाल शुरू
एलपीजी कमी के चलते ओडिशा के भोजनालयों ने मेन्यू में कटौती; कोयला व लकड़ी का इस्तेमाल शुरू
भुवनेश्वर/बरहमपुर, 23 मार्च (भाषा) ओडिशा में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण सड़क किनारे सैकड़ों ढाबे और छोटे रेस्तरां को अपना मेन्यू घटाने, दाम बढ़ाने और कई मामलों में कोयला तथा लकड़ी का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
भुवनेश्वर के एक शाकाहारी रेस्तरां के प्रबंधक प्रशांत कुमार भट्ट ने कहा कि संकट के चलते उन्हें अपने मेन्यू में भारी कटौती करनी पड़ी है।
उन्होंने कहा, “पहले हम ग्राहकों को 180 व्यंजन परोसते थे, लेकिन अब पर्याप्त सिलेंडर नहीं मिलने के कारण इसे घटाकर 18 कर दिया गया है।”
उन्होंने बताया कि अब कई व्यंजन इंडक्शन पर तैयार किए जा रहे हैं।
राजधानी का प्रसिद्ध ‘किशोर मटन’ होटल भी गैस की कमी के कारण अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल कर रहा है।
होटल के मालिक ने कहा, “पर्याप्त सिलेंडर नहीं मिलने के कारण हमने रात का खाना परोसना बंद कर दिया है।”
इस संकट के चलते ‘खाओगली’ क्षेत्र के कई ‘स्ट्रीट फूड’ विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद कर दी हैं, जबकि अन्य ने खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए हैं।
इसी तरह, दक्षिण भारतीय व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध ब्रह्मपुर के कई टिफिन सेंटर संचालकों ने भी एलपीजी आपूर्ति में कथित कमी के बीच कीमतें बढ़ा दी हैं।
इडली, वडा और पूड़ी जैसे व्यंजन, जो पहले 5 रुपये प्रति नग मिलते थे, अब सात रुपये में बिक रहे हैं, जबकि उपमा और डोसे की कीमतें क्रमशः 10 और 30 रुपये से बढ़ाकर 15 और 40 रुपये कर दी गई हैं।
उन्होंने कहा, “ईंधन और खाद्य तेल पर अधिक खर्च होने के कारण हमें विभिन्न वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़े हैं।”
ब्रह्मपुर में खल्लिकोट यूनिटरी यूनिवर्सिटी के पास ‘घुगनी’ बेचने वाले कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने बताया कि उन्होंने इसकी कीमत 25 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रति प्लेट कर दी है।
वाणिज्यिक एलपीजी की कमी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर जिला प्रशासन की सख्ती के चलते कई विक्रेताओं को अपना काम बंद करना पड़ा है।
बीजिपुर क्षेत्र के पास जलेबी बनाने वाले बृंदाबन पांडा ने कहा कि उन्हें अपनी इकाई बंद करनी पड़ी।
बालासोर जिले के बलियापाल इलाके में स्थित छोटे भोजनालय ‘बिष्णुप्रिया होटल’ के मालिक ने बताया कि उन्होंने मेन्यू घटाकर केवल चावल, दाल, सब्जी, पापड़ जैसे बुनियादी खाद्य पदार्थ ही परोसना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, “अगर ऐसी स्थिति जारी रही तो हमें होटल बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
कटक में एक होटल मालिक ने बताया कि इस स्थिति से इस व्यवसाय पर निर्भर कई कामगार भी प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा, “मेरे साथ-साथ रसोइयों और आपूर्तिकर्ताओं सहित कई लोग इस होटल पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं। इसलिए हमने सीमित खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए लकड़ी का इस्तेमाल शुरू किया है।”
एलपीजी की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी भी परेशानी झेल रहे हैं, जो आमतौर पर मेस में खाना खाते है या छोटे सिलेंडरों पर खुद खाना पकाते हैं।
हालांकि, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री के सी पात्रा ने कहा कि राज्य में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि राज्य में फिलहाल 14,000 वाणिज्यिक सिलेंडर उपलब्ध हैं, जबकि दैनिक मांग करीब 2,000 है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है।
उन्होंने कहा, “जहां पहले 20 प्रतिशत वाणिज्यिक उपयोग के लिए निर्धारित था, वहीं अब केंद्र सरकार ने राज्यों को होटल और रेस्तरां के लिए अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन की अनुमति दी है। शेष 10 प्रतिशत आपूर्ति कुछ शर्तों के अधीन है, जिनका हम पालन करेंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए कई स्थानों पर छापेमारी तेज कर दी है।
पात्रा ने चेतावनी दी, “अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
भाषा
राखी नरेश
नरेश

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