निर्वाचन आयोग एसआईआर सॉफ्टवेयर की जानकारी ‘छिपा’ रहा: गोखले ने आरटीआई जवाब का दिया हवाला

निर्वाचन आयोग एसआईआर सॉफ्टवेयर की जानकारी 'छिपा' रहा: गोखले ने आरटीआई जवाब का दिया हवाला

निर्वाचन आयोग एसआईआर सॉफ्टवेयर की जानकारी ‘छिपा’ रहा: गोखले ने आरटीआई जवाब का दिया हवाला
Modified Date: September 24, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: September 24, 2026 4:27 pm IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने एक आरटीआई जवाब का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए इस्तेमाल किये गए सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम की जानकारी छिपा रहा है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर अर्जी के जवाब में आयोग ने कहा था कि मांगी गई जानकारी ‘‘व्यावसायिक विश्वास, व्यापारिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा’’ से जुड़ी थी।

गोखले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, अपनी आरटीआई अर्जी और निर्वाचन आयोग से मिला जवाब साझा किया। साथ ही, उन्होंने सवाल किया कि किसी सार्वजनिक प्राधिकार द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर की जानकारी व्यावसायिक हितों का हवाला देकर क्यों छिपाई जा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने निर्वाचन आयोग से सॉफ्टवेयर का विवरण, उसे किसने डिजाइन किया और निविदा किसे दिया गया, के बारे में पूछा था। हैरानी की बात है कि आयोग ने यह कहते हुए विवरण देने से इनकार कर दिया कि इससे ‘व्यावसायिक विश्वास प्रभावित’ होगा।’’

गोखले ने कहा, ‘‘एक सार्वजनिक प्राधिकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर को ‘व्यावसायिक हितों’ के नाम पर गोपनीय रखा जा रहा है। इसलिए, किस कंपनी के व्यावसायिक हितों की रक्षा की जा रही है?’’

उन्होंने 17 अप्रैल की अपनी आरटीआई अर्जी में, पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए ‘एरोनेट’ में शामिल एल्गोरिदम से जुड़े तकनीकी दस्तावेज मांगे थे। साथ ही, इसके सॉफ्टवेयर, गड़बड़ियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किये गए तर्क और मानदंड, खरीद और विकास से जुड़े दस्तावेज, जांच और प्रमाणीकरण रिपोर्ट, फाइल नोटिंग और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को जारी किए गए निर्देश की भी जानकारी देने का अनुरोध किया गया था।

‘एरोनेट’ भारत के मतदाता डेटाबेस का प्रबंधन करने के लिए निर्वाचन आयोग की केंद्रीकृत प्रणाली है।

आयोग ने 21 जुलाई को अपने जवाब में कहा था कि मांगी गई जानकारी को आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(डी) के तहत सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है। इस धारा में व्यावसायिक विश्वास, व्यापारिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा जैसी जानकारी शामिल है।

बृहस्पतिवार को अपनी पोस्ट में गोखले ने आरोप लगाया कि आयोग ‘‘एसआईआर के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी छिपा रहा है।’’ उन्होंने सवाल किया कि किस कंपनी के व्यापारिक हितों की रक्षा की जा रही है।

एक दिन पहले, अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान नाम जोड़े और हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं।

भाषा

सुभाष देवेंद्र

देवेंद्र


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