निर्वाचन आयोग ने बंगाल में अधिकारियों के तबादले के खिलाफ जनहित याचिका की पोषणीयता पर उठाया सवाल

निर्वाचन आयोग ने बंगाल में अधिकारियों के तबादले के खिलाफ जनहित याचिका की पोषणीयता पर उठाया सवाल

निर्वाचन आयोग ने बंगाल में अधिकारियों के तबादले के खिलाफ जनहित याचिका की पोषणीयता पर उठाया सवाल
Modified Date: March 23, 2026 / 07:05 pm IST
Published Date: March 23, 2026 7:05 pm IST

कोलकाता, 23 मार्च (भाषा) निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद उसके द्वारा कई अधिकारियों का तबादला किये जाने के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका की पोषणीयता पर सोमवार को सवाल उठाया।

जनहित याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता पेशे से वकील हैं। उन्होंने दावा किया है कि 15 मार्च को विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद से निर्वाचन आयोग ने 63 पुलिस अधिकारियों और 16 प्रशासनिक अधिकारियों सहित कुल 79 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया है।

याचिकाकर्ता ने मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दावा किया कि मुख्य सचिव और गृह सचिव सहित अन्य शीर्ष अधिकारियों के तबादलों से राज्य की शासन व्यवस्था में एक शून्यता पैदा हो गई है।

याचिकाकर्ता का पक्ष रखने के लिए पीठ के समक्ष पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग मनमाने ढंग से काम कर रहा है और राज्य में चुनाव कराने से पहले अपनी पसंद के अधिकारियों को नियुक्त कर रहा है।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने याचिकाकर्ता की दलीलों का समर्थन किया।

निर्वाचन आयोग का पक्ष रखने के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि आयोग की शक्तियां कानून प्रदत्त हैं और उसका पवित्र कर्तव्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है।

उन्होंने जनहित याचिका के रूप में अर्जी की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि याचिकाकर्ता एक पूर्णकालिक सरकारी वकील हैं और इसलिए जनहित याचिका दायर करने के दौरान वह स्वयं को जनता का हितैषी होने का दावा नहीं कर सकते।

नायडू ने पश्चिम बंगाल के साथ भेदभाव करने के याचिकाकर्ता के दावे का खंडन करते हुए दलील दी कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में भी विधानसभा चुनावों के दौरान कई अधिकारियों के तबादले किये गए थे।

उन्होंने तबादलों के कारण पश्चिम बंगाल में शासन व्यवस्था में किसी प्रकार की शून्यता पैदा होने के दावे का भी खंडन करते हुए कहा कि अधिकारी भले ही बदल जाएं, लेकिन पद वही रहते हैं और शासन प्रक्रिया पहले की तरह ही चलती रहती है।

अदालत ने इस मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी। उस दिन पक्षकार आगे की दलीलें पेश करेंगे।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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