निर्वाचन आयोग मामले का संज्ञान ले उच्चतम न्यायालय, सीईसी को जवाबदेह ठहराए: कांग्रेस
निर्वाचन आयोग मामले का संज्ञान ले उच्चतम न्यायालय, सीईसी को जवाबदेह ठहराए: कांग्रेस
नयी दिल्ली, 26 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच शनिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का तत्काल स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में यह दावा भी किया कि आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के माध्यम से उनका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है।
रमेश ने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किया गया बदलाव ‘‘पूरी तरह अवैध’’ है और निर्वाचन आयोग को इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि जुलाई, 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के बदलाव किया गया और इसमें एक नया अनिवार्य खंड जोड़ा गया, जिसमें आवेदकों से पूछा गया कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल थे।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह प्रावधान विशेष रूप से पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए बाधा पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में संशोधन करने की शक्ति निर्वाचन आयोग के बजाय केंद्र सरकार के पास है और ऐसा बदलाव संबंधित नियमों में संशोधन किए बिना नहीं किया जा सकता।
रमेश ने ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ का हवाला देते हुए दावा किया कि फॉर्म में बदलाव के लिए आवश्यक नियम संशोधन और संसद को इसकी सूचना देना जरूरी था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस बदलाव को ‘‘अवैध और अनधिकृत’’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी, ताकि युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले लोग बिना परेशानी के अपना पंजीकरण करा सकें।
रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में संवैधानिक परंपराओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन हुआ है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए।
रमेश ने एक अन्य पोस्ट में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 का जिक्र किया, जो राज्यसभा में 12 दिसंबर, 2023 और लोकसभा में 21 दिसंबर, 2023 को पारित हुआ था।
उन्होंने दावा किया कि इस कानून ने निर्वाचन आयोग के प्रमुख और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलट दिया तथा पद पर रहते हुए लिए गए फैसलों के संबंध में उन्हें जांच और अभियोजन से पूर्ण संरक्षण दिया।
रमेश ने कहा कि विधेयक के विरोध में 12 दिसंबर 2023 को पूरा विपक्ष राज्यसभा से ‘वॉकआउट’ कर गया था और लोकसभा में विधेयक पारित होने से पहले विपक्ष के 100 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक को ‘‘बदले की भावना’’ से जल्दबाजी में पारित कराया गया था और अब इसके पीछे का कारण स्पष्ट हो रहा है।
भाषा हक दिलीप नेत्रपाल
नेत्रपाल

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