निर्वाचन आयोग ने बंगाल में एसआईआर के बाद की मतदाता सूचियों का चरणबद्ध प्रकाशन शुरू किया
निर्वाचन आयोग ने बंगाल में एसआईआर के बाद की मतदाता सूचियों का चरणबद्ध प्रकाशन शुरू किया
कोलकाता, 28 फरवरी (भाषा) निर्वाचन आयोग (ईसी) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद की मतदाता सूचियों को शनिवार को चरणबद्ध तरीके से प्रकाशित करना शुरू किया और बांकुड़ा जिले के आंकड़ों से पता चलता है कि इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद से लगभग 1.18 लाख नाम हटाए गए हैं।
बांकुड़ा और कूच बिहार सहित कई जिलों में अद्यतन सूचियों की प्रति सार्वजनिक रूप से लगा दी गई है, हालांकि प्राप्त अंतिम रिपोर्ट के अनुसार निर्वाचन आयोग के निर्दिष्ट पोर्टल और मोबाइल ऐप पर ये सूचियां ऑनलाइन उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
बांकुड़ा में पिछले साल चार नवंबर को एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने पर मतदाताओं की संख्या 30,33,830 थी, वहीं 16 दिसंबर को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में यह संख्या घटकर 29,01,009 रह गई।
एसआईआर के बाद के चरण में सुनवाई और जांच के बाद लगभग 4,000 और नाम हटा दिए गए। हालांकि, नए मतदाताओं को शामिल करने के लिए बनाए गए फॉर्म छह के तहत कुछ हजार नए आवेदनों को मंजूरी दी गई।
जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बांकुड़ा की अंतिम मतदाता सूची में अब लगभग 29,15,000 मतदाता हैं, जो एसआईआर की शुरुआत के बाद से लगभग 1.18 लाख नामों की शुद्ध कमी को दर्शाती है।
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा कि मुख्य रूप से मृत्युदर, प्रवास, नाम में दोहराव या पता नहीं मिलने के कारण ये नाम हटाए गए जबकि नए नाम उचित सत्यापन के बाद जोड़े गए।
अन्य जिलों से रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
अधिकारियों के अनुसार विभिन्न जिलों में चरणबद्ध तरीके से सूची जारी की जा रही है और लंबित मामलों के निपटारे के साथ-साथ पूरक सूचियां जारी किए जाने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, 16 दिसंबर को जारी मसौदा मतदाता सूची में 7.08 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल थे जिन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है – ‘स्वीकृत’, ‘हटाए गए’ और ‘निर्णयाधीन/विचाराधीन’।
आयोग के सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि उत्तरी कोलकाता के कुछ हिस्सों में स्वीकृत मतदाता सूचियों से लगभग 17,000 नाम गायब पाए गए, जिससे प्रतिद्वंद्वी दलों की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो गईं।
मसौदा मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित हुई थी जिसके अनुसार मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। मसौदा मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को इस आधार पर गणना प्रपत्र वितरित किए गए थे कि उनके नाम अगस्त 2025 तक राज्य की मतदाता सूची में शामिल हैं। 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मृत्युदर, प्रवास, नाम दोहराव या पता नहीं मिलने के कारण हटा दिए गए।
राज्य में एसआईआर 2002 के बाद से इस तरह का पहला राज्यव्यापी अभ्यास है।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पिछले साल चार नवंबर को मतदाताओं के बीच जनगणना प्रपत्रों के वितरण के साथ शुरू हुई थी। निर्वाचन आयोग को राजनीतिक उथल-पुथल, दस्तावेज सत्यापन नियमों में संशोधन और कानूनी चुनौतियों के बीच इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से पूरा करने और अंतिम लेकिन अपूर्ण सूची प्रकाशित करने में 116 दिन लगे।
दूसरे चरण में 1.67 करोड़ मतदाताओं पर विचार किया गया, जिनमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं के संबंध में ‘तार्किक विसंगतियां’ पाई गईं और 31 लाख मतदाताओं की ‘मैपिंग’ (दस्तावेजों का मिलान) नहीं हुई थी।
लगभग 60 लाख मतदाताओं के नाम अब भी जनगणना प्रपत्रों में ‘तार्किक विसंगतियों’ के आधार पर कानूनी कार्रवाई के अधीन हैं।
इस बीच, राज्य भर में जिला निर्वाचन कार्यालयों और साइबर कैफे के बाहर लंबी कतारें देखी गईं क्योंकि चिंतित मतदाता अद्यतन मतदाता सूची में अपना नाम जांचने के लिए केंद्रों पर उमड़ पड़े।
भाषा सुरभि शफीक
शफीक

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