जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए ईडी और अन्य एजेंसियों ने बनाई रणनीति

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जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए ईडी और अन्य एजेंसियों ने बनाई रणनीति

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 08:24 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 08:24 PM IST

श्रीनगर, आठ सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर लगाम लगाने के उपायों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए), सीमा शुल्क और राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) समेत विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को विचार-विमर्श किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

यह चर्चा केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मादक पदार्थों के नियंत्रण पर आयोजित दूसरी संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठक में हुई।

इस बैठक की अध्यक्षता स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के उप महानिदेशक संबित मिश्रा ने की।

पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ ईडी, बीएसएफ, राज्य औषधि नियंत्रक, आईबी, सीमा शुल्क, डीआरआई, आयकर विभाग और एनआईए समेत विभिन्न प्रवर्तन एवं संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जम्मू, श्रीनगर और गांदरबल जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) ने बैठक में भाग लिया। ’’

उन्होंने बताया कि बैठक में शामिल एजेंसियों ने अपने अनुभव और प्रवर्तन संबंधी पहल को साझा किया तथा मादक पदार्थों की तस्करी के नए तरीकों, अंतरराज्यीय नेटवर्क, अवैध खेती, सूचना साझा करने, संयुक्त जांच, वित्तीय जांच और प्रभावी अभियोजन जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

प्रवक्ता ने कहा कि इस साल की शुरुआत में नयी दिल्ली में आयोजित नार्को-समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी ‘मादक पदार्थ नियंत्रण पर दृष्टिपत्र (2026-2029)’ के क्रियान्वयन के प्रयासों पर भी चर्चा हुई।

इस बैठक में मादक पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए नेटवर्क आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।

प्रवक्ता ने कहा कि एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त पूछताछ, प्रभावी वित्तीय जांच और उपलब्ध सूचना साझा करने की व्यवस्थाओं के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश

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