ब्रिटिश नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 आरोपी हिरासत में

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ब्रिटिश नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 आरोपी हिरासत में

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 09:27 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 09:27 PM IST

कानपुर, आठ सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के जाजमऊ थाना क्षेत्र में पुलिस ने ब्रिटेन के नागरिकों के साथ ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 11 कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि खुफिया सूचना पर साइबर अपराध, स्वाट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सोमवार शाम छापा मारा।

उन्होंने बताया कि मौके पर सात पुरुष और चार महिलाएं काम करती मिलीं।

लाल के मुताबिक, कॉल सेंटर केडीए कॉलोनी स्थित तीन मंजिला इमारत ‘जमजम टावर’ के दो कमरों में संचालित किया जा रहा था, जिसका किराया 18,000 रुपये प्रति माह बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर के कर्मचारी खुद को कर्ज समाधान एजेंट बताकर ब्रिटेन में कर्ज में फंसे लोगों को फोन करते थे और ‘इंडिविजुअल वॉलंटरी अरेंजमेंट’ (आईवीए) के जरिये कर्ज का बड़ा हिस्सा माफ कराने का झांसा देते थे।

पुलिस ने बताया कि जब कोई पीड़ित जाल में फंस जाता था, तो उसका मामला लखनऊ के गोमती नगर में ‘इटर्निटी इंफोटेक’ नाम से कॉल सेंटर चलाने वाले युवराज को स्थानांतरित कर दिया जाता था।

पुलिस आयुक्त के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कॉल सेंटर लखनऊ पुलिस की ओर से पहले पकड़े गए कॉल सेंटर से जुड़ा प्रतीत होता है और इस संबंध में जानकारी लखनऊ पुलिस और खुफिया एजेंसियों से साझा की गई है।

उन्होंने बताया कि जाजमऊ कॉल सेंटर का संचालक अब्दुल वाहिद है, जो स्नातक है और पहले निफ्टेल और जेडए कनेक्ट में काम कर चुका है।

पुलिस के अनुसार, युवराज ने अब्दुल को 40,000 रुपये प्रति महीने के वेतन पर रखा था। उसने बताया कि अन्य आरोपियों की पहचान हसन, सत्यम, आमिर, ताबिश, फारूक और राहुल के रूप में हुई है, जबकि चार महिलाओं की पहचान उजागर नहीं की गई है।

पुलिस ने बताया कि कर्मचारियों को 15,000 से 40,000 रुपये तक का वेतन सीधे बैंक खाते में अंतरित किया जाता था और उन्हें ब्रिटिश लहजे में बात करने और पीड़ितों को संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता था।

पुलिस ने बताया कि कर्मचारियों को यह भी सिखाया जाता था कि अगर कोई पूछे कि कॉल भारत या पाकिस्तान से आ रही है, तो सवाल को कैसे टाल दें।

पुलिस ने कहा कि यह कॉल सेंटर करीब दो महीने पहले शुरू हुआ था और इसके पास वैध कारोबार का कोई लाइसेंस या पंजीकरण नहीं था। उसने बताया कि मौके से दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री बरामद की गई है तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम व भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

भाषा

सं आनन्द पारुल

पारुल