ईडी ने अल फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को मिली अंतरिम जमानत को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी

ईडी ने अल फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को मिली अंतरिम जमानत को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी

ईडी ने अल फलाह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष को मिली अंतरिम जमानत को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी
Modified Date: March 12, 2026 / 09:51 pm IST
Published Date: March 12, 2026 9:51 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह विश्वविद्यालय समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी को धनशोधन के एक मामले में दी गयी दो सप्ताह की अंतरिम जमानत को बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

ईडी ने यह तर्क दिया कि निचली अदालत ने लाल किला विस्फोट मामले में सिद्दीकी की संलिप्तता पर विचार नहीं किया।

ईडी के वकील ने न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी के समक्ष यह दलील दी कि सिद्दीकी की पत्नी का खराब स्वास्थ्य राहत हासिल करने के लिए केवल एक ‘बहाना’ था और निचली अदालत का फैसला त्रुटिपूर्ण एवं धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की व्यवस्था के विपरीत था।

उन्होंने यह भी दलील दी कि निचली अदालत का यह फैसला कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण दंपति के बच्चे भारत नहीं आ सकते, जमीनी हकीकत के विपरीत है।

उच्च न्यायालय ने सिद्दीकी को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की।

सिद्दीकी के वकील ने आश्वासन दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों में वह जमानत का दबाव नहीं बनायेंगे।

निचली अदालत ने सात मार्च को सिद्दीकी को धनशोधन मामले में दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। यह मामला फरीदाबाद स्थित उनके शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा दी गई फीस से कथित तौर पर अवैध धन जुटाने से जुड़ा है।

अदालत ने सिद्दीकी को कैंसर का इलाज करा रही अपनी पत्नी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत दी थी।

राहत प्रदान करते समय, निचली अदालत ने इस बात पर विचार किया कि दंपति के तीन बच्चे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पढ़ रहे हैं और पश्चिम एशिया में अशांति के कारण भारत की यात्रा करने में असमर्थ थे, जिससे महिला को तत्काल पारिवारिक सहायता नहीं मिल पा रही थी।

ईडी की ओर से वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि अगर 52,000 भारतीय यूएई से लौट सकते हैं, तो उनके बच्चे भी लौट सकते थे।

सिद्दीकी को 18 नवंबर, 2025 को ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्थानों में नामांकित विद्यार्थियों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।

ईडी की धनशोधन जांच दिल्ली पुलिस की अपराध द्वारा दर्ज दो प्राथमिकी पर आधारित है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए एनएएसी और यूजीसी की मान्यता का झूठा दावा किया था।

उस विश्वविद्यालय का नाम एक आतंकवाद से जुड़े मामले की जांच में सामने आया था, जिसमें इससे जुड़े दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था। इसके अस्पताल से जुड़े एक अन्य डॉक्टर, उमर-उन-नबी की पहचान 10 नवंबर को लाल किले के बाहर हुए विस्फोट में आत्मघाती हमलावर के रूप में की गई थी, जिसमें 15 लोग मारे गए थे।

भाषा

राजकुमार सुरेश

सुरेश


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