ईडी ने भूमि सौदा मामले में समन के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद्रा की याचिका का विरोध किया

ईडी ने भूमि सौदा मामले में समन के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद्रा की याचिका का विरोध किया

ईडी ने भूमि सौदा मामले में समन के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद्रा की याचिका का विरोध किया
Modified Date: May 14, 2026 / 06:28 pm IST
Published Date: May 14, 2026 6:28 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को कारोबारी रॉबर्ट वाद्रा द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिका का विरोध किया, जिसमें उन्होंने हरियाणा के शिकोहपुर में एक भूमि सौदे से जुड़े धनशोधन मामले में निचली अदालत द्वारा उन्हें तलब किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।

जांच एजेंसी के वकील ने न्यायमूर्ति मनोज जैन के समक्ष दलील दी कि वाद्रा की याचिका एक झूठे कानूनी तर्क पर आधारित है और इसलिए इसे खारिज कर दिया जाना चाहिए तथा जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।

एजेंसी ने वाद्रा की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी द्वारा दी गई दलील का खंडन किया, जिन्होंने यह कहा कि ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज अपराध, उस समय धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत ‘‘अनुसूचित अपराध’’ नहीं थे।

सिंघवी ने कहा कि जमीन का सौदा 2008 और 2012 के बीच हुआ था, तथा ईडी के मामले का आधार बनने वाले अपराधों को केवल 2013 तथा 2018 में अनुसूची में शामिल किया गया था।

हालांकि, ईडी के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता का दावा गलत है और यह ‘‘कानून के हिसाब से पूरी तरह से झूठा बयान’’ है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मई की तारीख निर्धारित की और वाद्रा के वकील से ईडी के दावे पर जवाब देने को भी कहा।

न्यायमूर्ति जैन ने कहा, ‘‘यदि आपका तर्क पूरी तरह से गलत है, तो हम आपकी मदद कैसे करेंगे? हम इस पर सोमवार को सुनवाई करेंगे।’’

निचली अदालत ने 15 अप्रैल, 2026 को ईडी द्वारा जुलाई 2025 में दायर आरोपपत्र में उल्लिखित अपराधों का संज्ञान लिया था और वाद्रा तथा अन्य से 16 मई को अपने समक्ष पेश होने को कहा था।

यह पहली बार था जब किसी जांच एजेंसी ने 57 वर्षीय वाद्रा के खिलाफ आपराधिक मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था। अप्रैल 2025 में, ईडी ने उनसे लगातार तीन दिन तक पूछताछ की थी।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव


लेखक के बारे में