हक के खिलाफ ईडी की कार्रवाई ‘ऑपरेशन लोटस 2.0’ का हिस्सा: तृणमूल कांग्रेस

हक के खिलाफ ईडी की कार्रवाई ‘ऑपरेशन लोटस 2.0’ का हिस्सा: तृणमूल कांग्रेस

हक के खिलाफ ईडी की कार्रवाई ‘ऑपरेशन लोटस 2.0’ का हिस्सा: तृणमूल कांग्रेस
Modified Date: September 8, 2026 / 06:44 pm IST
Published Date: September 8, 2026 6:44 pm IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि उसके राज्यसभा सदस्य नदीमुल हक के दिल्ली स्थित आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का छापा ‘‘ऑपरेशन लोटस 2.0’’ का हिस्सा है और यह उन पार्टी जनप्रतिनिधियों एवं नेताओं पर दबाव बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो दल बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।

तृणमूल सूत्रों ने दावा किया कि पार्टी के एक पूर्व नेता ने हक पर दबाव बनाने के प्रयास के तहत उनसे संपर्क किया था, लेकिन सांसद ने किसी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया।

ईडी ने सोमवार को धनशोधन की जांच के तहत हक और उर्दू अखबार ‘अखबार-ए-मशरिक’ से जुड़े कोलकाता, दिल्ली और रांची स्थित सात परिसरों की तलाशी ली थी।

दिल्ली स्थित हक के आधिकारिक आवास पर सोमवार को शुरू हुई छापेमारी रात करीब 10.20 बजे तक चली। यह आवास तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय के रूप में भी इस्तेमाल होता है।

तृणमूल ने दावा किया कि छापेमारी की कार्रवाई दोपहर करीब एक बजे पूरी हो गई थी, लेकिन अधिकारी लगभग 10 घंटे और परिसर में मौजूद रहे।

‘अखबार-ए-मशरिक’ के खिलाफ ईडी के आरोपों पर सवाल उठाते हुए तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने सवाल किया कि क्या प्रसार संख्या से जुड़े आरोप करीब 12 घंटे तक छापे का आधार बन सकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के तहत एजेंसी ने एक ऐसे व्यक्ति का बयान दर्ज किया, जिसे उर्दू भाषा का ज्ञान तक नहीं था।

‘बिटकॉइन’ से जुड़े आरोपों पर तृणमूल नेता ने कहा कि हक के वित्तीय लेनदेन वैध थे और उन्होंने अपने करों का विधिवत भुगतान किया था।

तृणमूल सूत्रों ने दावा किया कि छापेमारी के अंत में ईडी अधिकारियों ने हक से कहा कि ‘‘अगर आप सही रास्ते पर चलते हैं तो यह मामला आसानी से सुलझ सकता है।’’

पार्टी ने कहा कि हक अपने स्तर पर उचित कदम उठाएंगे और इस मामले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘हमारे सांसद मजबूत हैं। जिनमें रीढ़ की हड्डी है, वे आपके कितना भी प्रयास करने के बावजूद नहीं झुकेंगे।’’

इससे पहले ईडी के अधिकारियों ने कहा था कि जांच अखबार के खिलाफ कथित तौर पर सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देने वाली सामग्री के प्रसार, ‘‘बिना हिसाब’’ के नकद लेनदेन और संदिग्ध स्रोतों से धन प्राप्त करने के आरोपों से संबंधित है।

उन्होंने दावा किया था कि अखबार ने सरकारी विज्ञापन हासिल करने के लिए अपने प्रसार को ‘‘बढ़ा-चढ़ाकर’’ बताया और उसे अधिकांश धन तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस नीत पश्चिम बंगाल सरकार से एक विज्ञापन एजेंसी के माध्यम से मिला था, जिसके दुबई स्थित एक इकाई से संबंध हैं।

हक (56) ‘अखबार-ए-मशरिक प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक हैं, जो उर्दू दैनिक का प्रकाशन करती है। धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी का मामला बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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