मेरे खिलाफ ईडी के आरोप ‘‘नयी पटकथा में पुराने आरोप’’ जैसे : पिनराई विजयन
मेरे खिलाफ ईडी के आरोप ‘‘नयी पटकथा में पुराने आरोप’’ जैसे : पिनराई विजयन
कन्नूर (केरलम), 12 सितंबर (भाषा) केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन ने शनिवार को सीएमआरएल मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के नए आरोपों को ‘‘नयी पटकथा में पुराने आरोप’’ जैसा करार दिया।
ईडी ने हाल ही में राज्य पुलिस प्रमुख रवाडा ए चंद्रशेखर को पत्र भेजकर विजयन, उनकी बेटी और उनके परिवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। यह अनुरोध धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच और छापेमारी के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर किया गया।
ईडी ने आरोप लगाया है कि ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) ने ‘‘आईटी परामर्श सेवाओं’’ के नाम पर विजयन की बेटी वीणा टी की कंपनी (अब बंद हो चुकी) एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया।
माकपा के वरिष्ठ नेता विजयन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ईडी द्वारा लगाए गए आरोपों की प्रकृति में अब बड़ा बदलाव आया है।
विजयन ने कहा कि पहले आरोप यह था कि एक्सालॉजिक को बिना सेवाएं दिए पैसे मिलने के कारण सीएमआरएल को वित्तीय नुकसान हुआ और इसी आधार पर जांच तथा छापेमारी की गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘अब ईडी जो कह रही है, वह इससे पूरी तरह अलग है। ईडी अब कह रही है कि एक्सालॉजिक को मिला पैसा सेवाओं का पारिश्रमिक नहीं था, बल्कि जब मैं मुख्यमंत्री था तब मैंने सीएमआरएल को अनुचित लाभ पहुंचाया और यह पैसा उसके बदले रिश्वत के रूप में दिया गया।’’
उन्होंने कहा कि रिश्वत के आरोप लगाने से पहले ईडी को इस ‘‘मूल विरोधाभास’’ का जवाब देना चाहिए।
विजयन ने कहा, ‘‘मैं यहां यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल में सीएमआरएल को कोई अनुचित लाभ नहीं दिया गया। आज तक ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है, जिससे साबित हो कि इस तरह का कोई लाभ दिया गया था।’’
उन्होंने कहा कि एक्सालॉजिक को सीएमआरएल को अनुचित लाभ देने के बदले पैसा मिलने का आरोप नया नहीं है और यह 2024 में भी लगाया गया था, जब सतर्कता अदालत में मामले दायर किए गए थे। उन्होंने कहा कि सतर्कता अदालत ने सभी आरोपों की जांच की और शिकायतकर्ता द्वारा विशेष तथ्य तथा दस्तावेज पेश नहीं किए जाने के बाद अपना फैसला दिया।
विजयन ने कहा कि इसके बाद मामला केरलम उच्च न्यायालय पहुंचा, जिसने मार्च 2025 में याचिकाएं खारिज कर दीं और कहा कि आरोप मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त तथ्यों को साबित नहीं करते।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि केवल संदेह के आधार पर किसी लोकसेवक के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने से उसके सम्मान और सार्वजनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विजयन ने कहा कि बाद में मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
विजयन ने कहा कि आरोपों का स्वरूप बार-बार बदला गया, लेकिन मूल सवाल अब भी अनुत्तरित है कि मुख्यमंत्री रहते उन्होंने सीएमआरएल को कौन सा अनुचित लाभ दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी अपराध का आरोप लगाना है तो पहले उस अपराध के तथ्य सामने आने चाहिए। मुख्यमंत्री के तौर पर मैंने कौन सा लाभ दिया? कब दिया? किस आदेश के जरिए दिया? उसका दस्तावेजी सबूत कहां है? इसके बदले क्या मिला? इनमें से किसी का स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।’’
भाषा शोभना नेत्रपाल
नेत्रपाल

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