एटा (उप्र), 16 जनवरी (भाषा) एटा जिले के थाना जैथरा क्षेत्र में एक एचआईवी पीड़ित महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई जिसके आठ वर्षीय बेटे ने पोस्टमार्टम समेत अन्य प्रक्रिया पूरी कराई और अंतिम समय में अकेले ही मां का साथ निभाया। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, ग्राम नगला धीरज निवासी दिवंगत सुरेंद्र की पत्नी नीलम की इलाज के दौरान एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। उसके शव को उसका आठ वर्षीय पुत्र शनि अकेला लेकर पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा।
जैथरा के थानाध्यक्ष रितेश ठाकुर के अनुसार, नीलम पिछले करीब एक माह से गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं और इलाज के लिए फर्रुखाबाद स्थित अपने पिता के घर पर रह रही थीं। हालत बिगड़ने पर वह पांच दिन पूर्व अपने गांव जैथरा लौटीं और वहां से मेडिकल कॉलेज एटा में आकर भर्ती हो गईं, जहां उपचार के दौरान बुधवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
ठाकुर ने बताया कि नीलम की मौत के समय उसके साथ अस्पताल में केवल उसका आठ वर्षीय पुत्र शनि मौजूद था। मां की मौत के बाद बच्चा पूरी तरह अकेला पड़ गया। अस्पताल कर्मियों ने घटना की सूचना थाना जैथरा पुलिस को दी, जिस पर तत्काल पुलिसकर्मियों को भेजकर पंचनामा और आगे की विधिक प्रक्रिया पूरी कराई गई।
शनि ने पुलिस और पत्रकारों को बताया कि उसकी एक बहन राखी (15) है, जो ननिहाल (ग्राम नारायणपुर, जनपद फर्रुखाबाद) में रहती है। उसके पास किसी भी परिजन का मोबाइल नंबर नहीं था और वह किसी से संपर्क करने की स्थिति में नहीं था।
पोस्टमार्टम गृह पर शनि ने बताया कि कोई नहीं होने के कारण वह अकेले ही अपनी मां को पोस्टमार्टम के लिए लेकर आया है।
पुलिस के अनुसार नीलम के पति सुरेंद्र की मौत करीब आठ माह पूर्व हुई थी। वह भी एचआईवी से पीड़ित था। नीलम भी एचआईवी संक्रमित थी।
इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि महिला और उसका पति दोनों एचआईवी संक्रमित थे। बच्चों के संक्रमित होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि जन्म के समय मां एचआईवी संक्रमित थी तो बच्चे के पॉजिटिव होने की संभावना रहती है, अन्यथा नेगेटिव होने की भी पूरी संभावना है।
थानाध्यक्ष रितेश ठाकुर ने बताया कि परिजनों को बुलाकर अंतिम संस्कार के लिए सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। परिजनों, समाज के लोगों और पुलिस की मौजूदगी में दोपहर को अंतिम संस्कार कराया जायेगा। इस घटनाक्रम में पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए आगे बढ़कर बेसहारा बच्चे की मदद की।
भाषा सं आनन्द मनीषा
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