एल्गार परिषद मामला: न्यायालय अगले सप्ताह सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

एल्गार परिषद मामला: न्यायालय अगले सप्ताह सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

एल्गार परिषद मामला: न्यायालय अगले सप्ताह सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत
Modified Date: July 17, 2026 / 02:22 pm IST
Published Date: July 17, 2026 2:22 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को 2018 के एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी वकील सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि गडलिंग साढ़े सात साल से जेल में हैं और उन्होंने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।

सिब्बल ने न्यायालय को बताया कि उनकी जमानत याचिका पर पहली बार 2023 में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन मामले में न्यायाधीशों के अलग होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने पीठ से मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा, “हम इसे तुरंत सूचीबद्ध करेंगे। अगले सप्ताह या उसके आसपास।”

आठ, अगस्त 2025 को गडलिंग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई से उनके मुवक्किल के लंबे समय से जेल में बंद होने का हवाला देते हुए मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था।

ग्रोवर ने कहा था, ‘‘उच्चतम न्यायालय में जमानत याचिका 11 बार स्थगित हो चुकी है।’’

इससे पहले, 27 मार्च 2025 को, शीर्ष अदालत ने इस मामले में गडलिंग और कार्यकर्ता ज्योति जगताप की ज़मानत पर सुनवाई टाल दी थी।

उसने कार्यकर्ता महेश राउत को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की याचिका पर भी सुनवाई को स्थगित कर दिया था।

राउत को बंबई उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी थी, लेकिन एनआईए की मांग के बाद इस आदेश पर रोक लगा दी गई थी।

गडलिंग पर माओवादियों को सहायता प्रदान करने और मामले में फरार आरोपियों सहित कई सह-आरोपियों के साथ कथित तौर पर साजिश रचने का आरोप लगाया गया था।

उन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था और अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि गडलिंग ने भूमिगत माओवादी विद्रोहियों को सरकारी गतिविधियों और कुछ क्षेत्रों के नक्शों के बारे में गुप्त जानकारी प्रदान की थी।

उन्होंने कथित तौर पर माओवादियों से सुरजागढ़ खदानों के संचालन का विरोध करने को कहा था और कई स्थानीय लोगों को आंदोलन में शामिल होने के लिए उकसाया था।

गडलिंग 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में भी शामिल हैं।

पुलिस ने दावा किया कि इन भाषणों के कारण अगले दिन पुणे जिले के कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी थी।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि जगताप कबीर कला मंच (केकेएम) समूह की सक्रिय सदस्य थीं। इस समूह ने एल्गार परिषद सम्मेलन के दौरान अपनी नाट्य प्रस्तुति में न केवल आक्रामक, बल्कि अत्यधिक भड़काऊ नारे भी लगाए थे।

एनआईए के अनुसार, केकेएम प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का एक मुखौटा संगठन है।

बंबई उच्च न्यायालय ने कार्यकर्ता-सह-गायिका ज्योति जगताप की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने जमानत देने से इनकार करने वाले फरवरी 2022 के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। 2017 का एल्गार परिषद सम्मेलन पुणे शहर के मध्य स्थित 18वीं सदी के महल-किले शनिवारवाड़ा में आयोजित किया गया था।

भाषा तान्या प्रशांत

प्रशांत


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