प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और अरमबम मेमचौबी को अमर उजाला का ‘आकाशदीप’ शब्द सम्मान

प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और अरमबम मेमचौबी को अमर उजाला का ‘आकाशदीप’ शब्द सम्मान

प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और अरमबम मेमचौबी को अमर उजाला का ‘आकाशदीप’ शब्द सम्मान
Modified Date: January 15, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: January 15, 2026 9:57 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) साहित्य जीवन के समग्र अवदान के लिए 2025 का अमर उजाला का सर्वोच्च शब्द सम्मान ‘आकाशदीप’- हिंदी में प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और हिंदी से इतर भाषाओं में मणिपुरी की विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को दिया जाएगा।

अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान के अनुसार, अलंकरण में पांच-पांच लाख रूपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक के रूप में गंगा प्रतिमा शामिल है।

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अरमबम ओंगबी मेमचौबी का मूल नाम डा. थैनोजाम चानू इबेमहल है। एक जनवरी 1957 को जन्मी और मैतेई पुराकथाओं पर खास काम करने वाली मेमचौबी समकालीन मणिपुरी सृजन परिदृश्य की सशक्त आवाज हैं।

हिंदी के लिए सर्वोच्च अलंकरण ‘आकाशदीप’ के लिए चयनित दो नवंबर 1940 को जन्मी ममता कालिया ने स्त्रीवाद की आरंभिक हलचलों के बीच अपने लेखन से नयी लकीर खींची और 12 से अधिक उल्लेखनीय कृतियां दी हैं।

ममता कालिया मध्यम वर्ग की जटिलताओं और स्त्री की पहचान के संघर्ष को सशक्त स्वर देने के लिए जानी जाती हैं।

हिंदीतर भारतीय भाषाओं में गिरीश कर्नाड, भालचंद्र नेमाड़े, शंघ घोष, प्रतिभा राय, एमटी वासुदेवन नायर और सितांशु यशश्चंद्र के साथ हिंदी में नामवर सिंह, ज्ञानरंजन, विश्वनाथ त्रिपाठी, शेखर जोशी, विनोद कुमार शुक्ल और गोविंद मिश्र आकाशदीप से अलंकृत हो चुके हैं।

अमर उजाला के समूह सलाहकार और शब्द सम्मान के संयोजक यशवंत व्यास ने बताया कि भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न की पृष्ठभूमि में अमर उजाला फाउंडेशन ने 2018 में शब्द सम्मान की शुरूआत की थी।

अमर उजाला शब्द सम्मान-25 के तहत वर्ष 2024 में प्रकाशित श्रेष्ठ हिंदी कृतियों के लिए भी शब्द सम्मान की घोषणा कर दी गई है।

बयान के अनुसार, कविता वर्ग में सविता सिंह के संग्रह ‘वासना एक नदी का नाम है’, को श्रेष्ठ कृति के रूप में चुना गया है।

कथेतर वर्ग में नाइश हसन की कृति ‘मुताह’ और कथा वर्ग में शहादत के कथा संग्रह ‘कर्फ्यू की रात’ को श्रेष्ठ कृति का सम्मान दिया जाएगा।

भारतीय भाषाओं में अनुवाद का भाषा बंधु सम्मान ‘चरू चीवर और चर्या’ (मूल ओडिया कृति : प्रदीप दाश) के हिंदी अनुवाद के लिए सुजाता शिवेन तथा किसी भी रचनाकार की पहली किताब वाला सम्मान ‘थाप’ मनीष यादव की कृति ‘सुधारगृह की मालकिनें’ को दिया गया है।

इन सम्मानों में एक-एक लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक के रूप में गंगा प्रतिमा शामिल हैं।

बयान में कहा गया है कि ये पुरस्कार शीघ्र ही एक समारोह में प्रदान किए जाएंगे।

भाषा नरेश नरेश देवेंद्र

देवेंद्र


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