नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) कैंसर विशेषज्ञों ने बताया कि बचपन में होने वाले कैंसर के इलाज में केवल बीमारी का उपचार पर्याप्त नहीं है बल्कि बच्चों की भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है ताकि वे आत्मविश्वास हासिल कर सकें व सामान्य जीवन में लौट सकें।
राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र (आरजीसीआईआरसी) द्वारा बाल कैंसर जागरूकता माह के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में उपचार करा रहे बच्चों, कैंसर से उबर चुके लोगों, देखभाल करने वालों और अस्पताल के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र के बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजी एवं ऑन्कोलॉजी विभाग की निदेशक गौरी कपूर ने बताया कि कैंसर से लड़ाई के दौरान अलग-अलग चरणों में बच्चे की जरूरतें बदलती रहती हैं और देखभाल में उपचार के बाद की अवधि को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया, ‘‘बाल कैंसर की देखभाल एक लंबी सफर है और हर चरण में अलग-अलग तरह के सहयोग की आवश्यकता होती है। उपचार के साथ-साथ बच्चों को खुद को व्यक्त करने, आत्मविश्वास हासिल करने और दैनिक जीवन से दोबारा जुड़ने के अवसरों की जरूरत होती है।’’
गौरी ने बताया कि कैंसर से उबर चुके बच्चों की देखभाल और उनके समग्र स्वास्थ्य को कैंसर उपचार का अहम हिस्सा माना जाना चाहिए, इसे केवल ऐसी चिंता नहीं समझना चाहिए, जिस पर उपचार खत्म होने के बाद ध्यान दिया जाए।
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