रक्षा कंपनियों का स्वदेशी प्रौद्योगिकी और प्रणालियों के विकास पर जोर

रक्षा कंपनियों का स्वदेशी प्रौद्योगिकी और प्रणालियों के विकास पर जोर

रक्षा कंपनियों का स्वदेशी प्रौद्योगिकी और प्रणालियों के विकास पर जोर
Modified Date: April 30, 2026 / 06:33 pm IST
Published Date: April 30, 2026 6:33 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे होने वाले हैं और सरकार ने जिस ‘आत्मनिर्भर’ पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा दिया वह ‘और मजबूत’ हो रहा है तथा रक्षा क्षेत्र में भारत की निजी संस्थाओं को भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप आगे बढ़ने की आवश्यकता है। यह बात कई रक्षा कंपनियों ने कही।

उन्होंने संचार से संबंधित प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों सहित अधिक स्वदेशी प्रणालियां तथा प्रौद्योगिकियां विकसित करने की भी पैरवी की, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील डेटा ‘‘भारतीय नियंत्रण में रहें’’।

मिसाइलों से लेकर वायु रक्षा प्रणाली तक, भारत के कई स्वदेशी मंच और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का उपयोग मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था, जो पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था।

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाने की तैयारियों के बीच ड्रोन और ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकियों, साइबर खुफिया जानकारी, घुसपैठ-रोधी क्षमताओं के क्षेत्र में काम करने वाली कई रक्षा कंपनियों ने रक्षा क्षेत्र में निर्मित हो रहे आत्मनिर्भरता के पारिस्थितिकी तंत्र और इस दृष्टिकोण को मजबूत करने में निजी संस्थाओं द्वारा निभाई जा सकने वाली भूमिका को रेखांकित किया है।

रक्षा फर्म ‘सीएसटी साइबर एंड डिफेंस’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्य तलवार ने कहा कि वह ‘‘ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प और हमारी तेजी से आगे बढ़ रही प्रौद्योगिकी बढ़त की एक सशक्त पुष्टि के रूप में देखते हैं’’।

उन्होंने कहा कि इससे यह रेखांकित हुआ कि जब सरकार, सुरक्षाबल और उद्योग ‘‘साझा उद्देश्य’’ के साथ काम करते हैं तो भारतीय साइबर खुफिया, घुसपैठ-रोधी क्षमताएं और सटीक ड्रोन-रोधी प्रतिक्रियाएं निर्णायक प्रभाव डाल सकती हैं।

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से पहले जारी एक बयान में रक्षा फर्म के शीर्ष अधिकारी के हवाले से कहा गया, ‘‘महज एक वर्ष में, भारत ने न केवल वैश्विक प्रौद्योगिकी विकास को आत्मसात करने की असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया है, बल्कि सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और रक्षा नवाचार में उनसे आगे निकलने की क्षमता भी दिखाई है।’’

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा निर्मित किया जा रहा पारिस्थितिकी तंत्र ‘‘मजबूत है तथा यह और भी मजबूत होता जा रहा है’’।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अब निजी उद्योग, संस्थानों और सशस्त्र बलों की जिम्मेदारी है कि वे एकजुट होकर आगे बढ़ें तथा मजबूत संचार, उन्नत हथियार और वायु रक्षा प्रणालियाँ, एवं एआई-सक्षम रोबोटिक्स प्रदान करें जो किसी भी प्रतिद्वंद्वी को रोक सकें।’’

तलवार ने कहा कि जिस प्रकार सशस्त्र बल संघर्ष के समय कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं, उसी प्रकार भारत की साइबर, रक्षा और एयरोस्पेस कंपनियों तथा उनके अधिकारियों को ‘‘सबसे मजबूत, संप्रभु और भविष्य के लिए तैयार प्रणालियाँ पहले अपनी सरकार को तथा फिर दुनिया भर के साझेदारों को प्रदान करने के लिए एकजुट होना चाहिए।’’

कई अन्य रक्षा कंपनियों ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए और रक्षा क्षेत्र में अधिक ‘आत्मनिर्भरता’ की वकालत की, जिसमें निजी क्षेत्र इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में पूरक भूमिका निभा सकता है।

भारत सरकार भी यही कहती रही है कि निजी कंपनियों और स्टार्टअप कंपनियों को देश के सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म बनाने और निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें विदेशी कंपनियों से प्रौद्योगिकी एवं प्रणालियों की तलाश न करनी पड़े।

स्वदेशी प्रौद्योगिकी कंपनी ‘आईजी ड्रोन्स’ ने फरवरी में कहा था कि उसे रक्षा मंत्रालय से दुर्गम इलाकों में निगरानी के लिए अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम ड्रोन और आवश्यक सहायक उपकरणों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला है।

रक्षा कंपनी ने जनवरी में कहा था कि उसे स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन-रोधी प्रणाली के लिए थलसेना और नौसेना से ‘‘ऑर्डर मिला है’’, जिसका उद्देश्य शत्रु ड्रोन को नष्ट करने तथा उभरते हवाई खतरों का मुकाबला करने की उनकी क्षमताओं को मजबूत करना है।

भाषा नेत्रपाल संतोष

संतोष


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