हल्द्वानी, आठ सितंबर (भाषा) उत्तराखंड में हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 29 हेक्टेअर रेलवे भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय के बुधवार को संभावित फैसले से पहले क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी कर्मियों के साथ ड्रोन टीमें भी तैनात की गई हैं।
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. मंजुनाथ टीसी ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और बनभूलपुरा क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
एसएसपी ने कहा कि मामले में नौ सितंबर को उच्चतम न्यायालय का फैसला आने की संभावना है, जबकि इससे पहले आठ फरवरी 2024 को एक अवैध मजार ढहाए जाने के दौरान हुए व्यापक उपद्रव की घटना के मद्देनजर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बनभूलपुरा में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, क्षेत्र को दो सुपर जोन और चार जोन में बांटा गया है तथा तीन पुलिस अधीक्षक, पांच क्षेत्राधिकारी और 15 थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा पीएसी की दो कंपनियां भी तैनात की गई हैं।
पुलिस ने बताया कि निगरानी के लिए ड्रोन की दो टीम भी क्षेत्र में तैनात की गई हैं, जो संवेदनशील जगहों, गलियों और छतों पर पैनी नजर रखेंगी। ड्रोन के साथ-साथ जमीनी निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
पुलिस के अनुसार, अग्निशमन विभाग की चार यूनिट, यातायात पुलिस की चार टीम, बम निरोधक दस्ते की एक टीम, हॉक पुलिस की दो यूनिट, आंसू गैस के गोले दागने वाली दो टीम, दो दंगा रोधी टीम और फायरिंग दस्ते की दो टीम भी तैनात की गई हैं, जबकि आवश्यकतानुसार अन्य वाहन एवं संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
पुलिस ने कहा कि छतों पर पत्थर, रोड़ी, ईंट, मलबा, हथियार या हथियारनुमा वस्तुएं जमा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसएसपी ने लोगों से उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करने और शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि अफवाह, भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने तथा भड़काऊ बयानबाजी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे के मुताबिक, उसकी भूमि पर 4,365 परिवारों ने अतिक्रमण कर रखा है, जिनमें करीब पचास हजार लोग शामिल हैं। इनमें ज्यादातर मुसलमान परिवार शामिल हैं।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2022 में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने का आदेश दिया था, जिसे प्रभावित लोगों ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।
भाषा
सं दीप्ति पारुल
पारुल