Engineers Day 2025: भारत में 15 सितम्बर को क्यों मनाया जाता है अभियंता दिवस?.. देशभर के इंजीनियर करते है एम. विश्वेश्वरैया को याद..

भारत में हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। ये दिन महान अभियंता और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित है, इस दिन को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि स्वरूप मनाया जाता है।

Engineers Day 2025: भारत में 15 सितम्बर को क्यों मनाया जाता है अभियंता दिवस?.. देशभर के इंजीनियर करते है एम. विश्वेश्वरैया को याद..

Image Source: FreePik

Modified Date: September 15, 2025 / 02:20 pm IST
Published Date: September 15, 2025 12:46 pm IST
HIGHLIGHTS
  • भारत के महान अभियंता डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती।
  • हर साल एक खास थीम के साथ इंजीनियर्स डे मनाया जाता है।
  • आधुनिक भारत का विश्वकर्मा भी कहा जाता है।

Engineers Day 2025:  भारत में हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है। ये दिन महान अभियंता और भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती को समर्पित है। सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया एक भारतीय सिविल इंजीनियर, प्रशासक और राजनेता थे, जो 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहे और उन्होंने मैसूर के कृष्णराज सागर बांध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी भूमिका निभाई और उन्हें आधुनिक भारत का विश्वकर्मा भी कहा जाता है। आइए जानते हैं की इंजीनियर्स डे 15 सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है?

15 सितंबर ही क्यों?

सर एम. विश्वेश्वरैया को आधुनिक भारत के महानतम इंजीनियरों में गिना जाता है। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में बहुत  महत्वपूर्ण काम किया। उनके द्वारा बनाए गए बाँध, जलाशय और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स आज भी देश की आधारभूत संरचना की पहचान हैं, और उनको इसके लिए अभी भी याद किया जाता है। उनके जन्मदिन, 15 सितंबर, को भारत में अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि स्वरूप मनाया जाता है।

सर एम. विश्वेश्वरैया कौन थे?

•उनका जन्म: 15 सितंबर 1861, कर्नाटक के कोलार ज़िले में एक तेलुगु परिवार में हुआ था।
•परिवार: पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वेदाचार्य थे।
•शिक्षा: पुणे के साइंस कॉलेज से 1883 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
•करियर: सहायक अभियंता के रूप में शुरुआत की और 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान (प्रधान) रहे। इस दौरान कई शैक्षिक संस्थान और उद्योग स्थापित किए, जिसके कारण उन्हें “आधुनिक मैसूर का जनक” कहा जाता है।

उपलब्धियाँ:

•कृष्णराज सागर बाँध का निर्माण
•जल प्रबंधन में सुधार
•ब्रिटिश सरकार द्वारा नाइट की उपाधि से सम्मानित
•“कर्नाटक के भागीरथ” नाम से भी प्रसिद्ध
•मृत्यु: 1962 में 102 वर्ष की आयु में।

इंजीनियर्स डे का महत्व

•ये दिन केवल सर एम. विश्वेश्वरैया को याद करने का नहीं, बल्कि उन सभी इंजीनियरों को सम्मान देने का अवसर है जो समाज और देश के विकास में योगदान करते हैं।
•ये दिन इंजीनियरों की रचनात्मकता, समर्पण और नवाचार को सलाम करने का प्रतीक है।
•भारत के अलावा श्रीलंका और तंज़ानिया जैसे देश भी इसी तारीख को इंजीनियर्स डे मनाते हैं।


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