मोदी सरकार में पर्यावरण मंत्रालय ‘प्रवचन मंत्रालय’ बन गया है : कांग्रेस

मोदी सरकार में पर्यावरण मंत्रालय 'प्रवचन मंत्रालय' बन गया है : कांग्रेस

मोदी सरकार में पर्यावरण मंत्रालय ‘प्रवचन मंत्रालय’ बन गया है : कांग्रेस
Modified Date: July 8, 2026 / 11:43 am IST
Published Date: July 8, 2026 11:43 am IST

नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में शासन व्यवस्था पूरी तरह विफल हो गई है और यह मंत्रालय पर्यावरण संरक्षण के अपने दायित्वों का निर्वहन करने के बजाय ‘प्रवचन मंत्रालय’ बनकर रह गया है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में मंत्रियों के निजी स्टाफ में होने वाली सभी प्रमुख नियुक्तियों की प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जांच-पड़ताल होती है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के चार करीबी सहयोगियों को लगातार दो दिनों में दो चरणों में हटा दिया गया, जिनमें एक सहयोगी को मंत्री का सबसे करीबी एवं विश्वासपात्र माना जाता था।

रमेश ने दावा किया कि इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि इस महत्वपूर्ण मंत्रालय में शासन व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में मंत्रालय पर्यावरण और वनों की रक्षा करने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में विफल रहा है।

कांग्रेस नेता के अनुसार, ग्रेट निकोबार, मध्य एवं पूर्वी भारत के सघन वन क्षेत्रों, अरावली पर्वतमाला और अन्य जैव विविधता से समृद्ध पारिस्थितिक तंत्रों में पर्यावरणीय विनाश लगातार जारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण का जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, और जिन मानकों को अद्यतन कर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए, उन पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

रमेश ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार को इन मुद्दों की कोई परवाह है?

उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ‘पर्यावरण मंत्रालय’ के बजाय ‘प्रवचन मंत्रालय’ बन गया है।

उल्लेखनीय है कि पर्यावरण मंत्रालय ने एक साथ एक निजी सचिव और दो अतिरिक्त निजी सचिवों को हटा दिया है।

विभाग के मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी सचिव को “प्रशासनिक आधार” पर हटा दिया गया, जबकि एक अतिरिक्त निजी सचिव की सेवा खत्म कर दी गई और दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव को उनके मूल कैडर में “समय से पहले वापस” भेज दिया गया।

भाषा हक तान्या मनीषा

मनीषा


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