पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों की मृत्यु दर को कम करने के लिए संवेदनशील रेलवे खंडों की पहचान की

पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों की मृत्यु दर को कम करने के लिए संवेदनशील रेलवे खंडों की पहचान की

पर्यावरण मंत्रालय ने हाथियों की मृत्यु दर को कम करने के लिए संवेदनशील रेलवे खंडों की पहचान की
Modified Date: March 12, 2026 / 05:37 pm IST
Published Date: March 12, 2026 5:37 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय और रेलवे ने जानवरों के कारण होने वाले ट्रेन हादसों को रोकने के लिए 110 संवेदनशील क्षेत्रों और बाघों के आवास क्षेत्रों वाले दो राज्यों में 17 अतिरिक्त क्षेत्रों की पहचान की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस तरह की टक्करों को रोकने के लिए कई प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों का भी परीक्षण किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई), राज्य वन विभागों और भारतीय रेलवे की टीमों द्वारा किए गए व्यापक संयुक्त क्षेत्र सर्वेक्षणों में, स्थल-विशिष्ट पारिस्थितिक स्थितियों का मूल्यांकन किया गया और प्रत्येक स्थान के अनुरूप लक्षित शमन उपायों का प्रस्ताव दिया गया।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘3,452.4 किलोमीटर में फैले 127 रेलवे खंडों के विस्तृत मूल्यांकन के आधार पर, जानवरों की आवाजाही के चलन और पशु मृत्यु दर के जोखिम को ध्यान में रखते हुए, 14 राज्यों में फैले 1,965.2 किलोमीटर के 77 खंडों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान के लिए चुना गया।’

अधिकारी ने बताया कि इन प्राथमिकता वाले हिस्सों के लिए अनुशंसित समाधान पैकेज में 503 रैंप और लेवल क्रॉसिंग, 72 पुलों का विस्तार और संशोधन, 39 बाड़ या खाई संरचनाएं, चार निकास रैंप, 65 नए अंडरपास और 22 ओवरपास शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘सुरक्षित वन्यजीव आवागमन को सुगम बनाने और टकराव को कम करने के लिए कुल मिलाकर 705 सुरक्षा संरचनाएं बनाई गई हैं।’

अधिकारी ने कहा कि वन्यजीवों और ट्रेनों के बीच टक्कर को रोकने के लिए कई प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों का परीक्षण और कार्यान्वयन भी किया जा रहा है।

भाषा तान्या नरेश

नरेश


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