कार्यपालिका को सार्वजनिक रोजगार में तदर्थवाद को समाप्त करना होगा: उच्चतम न्यायालय

कार्यपालिका को सार्वजनिक रोजगार में तदर्थवाद को समाप्त करना होगा: उच्चतम न्यायालय

कार्यपालिका को सार्वजनिक रोजगार में तदर्थवाद को समाप्त करना होगा: उच्चतम न्यायालय
Modified Date: May 7, 2026 / 09:33 pm IST
Published Date: May 7, 2026 9:33 pm IST

नयी दिल्ली, सात मई (भाषा) शिक्षा को तदर्थ उपायों से सब्सिडी देने के बजाय उसे मजबूत करना समय की आवश्यकता बताते हुए, उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य भर में सहायक शिक्षकों और सहायक आचार्यों के कुल रिक्त पदों में से 50 प्रतिशत पद विशेष रूप से पैरा-शिक्षकों के लिए चार सप्ताह के भीतर अधिसूचित करे।

शिक्षकों की कमी को शीघ्रता से दूर करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान जैसी सरकारी पहलों के तहत पैरा-शिक्षकों को निश्चित अवधि के अनुबंध पर नियुक्त किया जाता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यपालिका के लिए समय आ गया है कि वह नियमित रूप से प्रदर्शन संबंधी ऑडिट करे और सार्वजनिक रोजगार में तदर्थवाद को समाप्त करे।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि वह सहायक शिक्षकों और सहायक आचार्यों दोनों के लिए निर्धारित रिक्तियों में से 50 प्रतिशत पदों पर नियुक्ति के लिए केवल पैरा-शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित करने वाली अधिसूचना जारी करे।

न्यायालय ने कहा कि अदालतें कार्यपालिका को सलाह नहीं देतीं, लेकिन कार्यपालिका तदर्थ तंत्र स्थापित करके समाज की प्रगति और बच्चों के भविष्य को प्रभावित करेगी।

शीर्ष अदालत झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ पैरा-शिक्षकों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वरिष्ठता और निरंतर सेवा के आधार पर सहायक शिक्षकों के रूप में सेवाओं को नियमित करने की उनकी याचिकाओं के साथ-साथ कई अन्य राहतों के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।

उनकी सेवाओं को नियमित करने से इनकार करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि इस संबंध में कोई भी राहत प्रदान करने से भर्ती का एक नया तरीका तैयार होगा जो कानून द्वारा स्वीकृत नहीं है।

भाषा नेत्रपाल माधव

माधव


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