उप्र: कबीर मंदिर के सामने कूड़ा डालने पर उच्‍च न्‍यायालय ने नगर आयुक्त को स्थायी समाधान के निर्देश

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उप्र: कबीर मंदिर के सामने कूड़ा डालने पर उच्‍च न्‍यायालय ने नगर आयुक्त को स्थायी समाधान के निर्देश

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 09:47 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 09:47 PM IST

लखनऊ, आठ सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने मड़ियांव इलाके में कबीर मंदिर के सामने सड़क किनारे खुले में कूड़ा डाले जाने के मामले में नगर निगम से सख्त एतराज जताया है और कहा कि सड़क किनारे इस तरह कूड़ा बिखरा होना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि इससे क्षेत्र में रहने वाले लोगों और राहगीरों के स्वास्थ्य व स्वच्छता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

पीठ ने लखनऊ के नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि कूड़ा डालने के लिए किसी अन्य स्थान की संभावना तलाशें। यदि संभव हो तो वहां ‘कॉम्पैक्टर’ (कचरे को दबाकर उसका आकार कम करने वाली मशीन) लगाने के उपाय भी किए जाएं। अदालत ने स्थायी समाधान तलाश कर उसे लागू करने और तब तक स्वास्थ्य व स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी व्यवस्था करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने स्थानीय निवासी कुलदीप की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि कबीर मंदिर, ब्रह्मनगर, मड़ियांव के सामने खुले स्थान पर नगर निगम के कर्मचारी कूड़ा-करकट डालते हैं। इससे गंदगी और दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से अदालत में कुछ तस्वीरें पेश की गईं। तस्वीरें देखने के बाद पीठ ने कहा कि तस्वीरों में स्थिति याचिका में बताए गए हालात से भी बदतर नजर आ रही है। सड़क से लगे खुले भूखंड में कूड़ा बिखरा हुआ है, जो साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। इससे निकलने वाली गंदगी और दुर्गंध आसपास रहने वालों के साथ राहगीरों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।

वहीं, नगर निगम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शैलेन्‍द्र सिंह चौहान ने कहा कि कूड़ा आवासीय क्षेत्र में नहीं बल्कि राजमार्ग के किनारे डाला जा रहा है। इस पर पीठ ने इसे अप्रासंगिक बताते हुए कहा कि सड़क के पास इस तरह कूड़ा बिखेरना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भाषा सं आनन्द सुरभि

सुरभि