दिल्ली में ‘फर्जी’ नौकरी भर्ती गिरोह का भंडाफोड़, पांच लोग गिरफ्तार

दिल्ली में 'फर्जी' नौकरी भर्ती गिरोह का भंडाफोड़, पांच लोग गिरफ्तार

दिल्ली में ‘फर्जी’ नौकरी भर्ती गिरोह का भंडाफोड़, पांच लोग गिरफ्तार
Modified Date: September 6, 2026 / 08:58 pm IST
Published Date: September 6, 2026 8:58 pm IST

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) ऑटोमोबाइल और अन्य प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी भर्ती गिरोह संचालित करने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि आरोपी रोजगार उपलब्ध कराने वाले ऑनलाइन मंच से प्राप्त उम्मीदवारों के विवरण के आधार पर उनसे संपर्क करते थे और भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग चरण पूरे करने के नाम पर उनसे लगातार पैसे लेते थे।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान सतीश चंदर मौर्य (30), बिंदिया उर्फ माही (20), प्रीति उर्फ सुप्रिया (22), प्राची उर्फ स्वीटी (19) और राधिका उर्फ भूमि (19) के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, एक सितंबर को उत्तरी जिले की पुलिस को संगम विहार-जहरौदा माजरा इलाके में एक संदिग्ध फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिली। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “छापेमारी की गई और तीन आरोपी नौकरी के इच्छुक लोगों को फोन करते हुए पाए गए। बाद में, जांच के दौरान दो अन्य आरोपियों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।”

आरोपी डेटा एंट्री ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट समेत विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देते थे और भर्ती से संबंधित फर्जी शुल्क के नाम पर पैसे मांगते थे।

पुलिस ने बताया कि पीड़ितों से पहले कूरियर शुल्क के नाम पर 499 रुपये, फिर यूनिफॉर्म के लिए 1,500 रुपये, लैपटॉप सिक्योरिटी के लिए 3,500 रुपये, खाता खोलने के लिए 5,500 रुपये, मेडिकल सिक्योरिटी के लिए 6,500 रुपये और हलफनामा शुल्क के नाम पर 8,500 रुपये मांगे जाते थे। इस तरह अलग-अलग चरणों में कुल 25,999 रुपये की मांग की जाती थी।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, सात एटीएम/डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, मोबाइल नंबरों वाली तीन नोटबुक और 6,730 रुपये नकद बरामद किए। फर्जी ‘नियुक्ति पत्र’ और क्यूआर कोड भी मिले हैं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी अलग-अलग बैंक खातों से जुड़े क्यूआर कोड के जरिए भुगतान लेते थे और आगे पैसे देने से इनकार करने वाले पीड़ितों को ब्लॉक कर देते थे।

मामले में पैसों के लेन-देन का पता लगाने, अन्य सहयोगियों की पहचान करने और पीड़ितों की संख्या का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

भाषा

राखी प्रशांत

प्रशांत


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