इसरो का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा : अंतरिक्ष एजेंसी

इसरो का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा : अंतरिक्ष एजेंसी

इसरो का न तो निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा : अंतरिक्ष एजेंसी
Modified Date: September 6, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: September 6, 2026 10:30 pm IST

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि न तो संस्था का निजीकरण किया जाएगा और न ही इसका महत्व कम होगा।

अंतरिक्ष एजेंसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसरो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अगली पीढ़ी पर मजबूती से ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि उद्योग जगत उन्नत प्रौद्योगिकी और क्षमताओं को बड़े पैमाने पर विकसित करेगा।

इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों ने चार सितंबर को अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष वी. नारायणन को पत्र लिखकर, विनिर्माण और संचालन से जुड़े कार्य को निजी कंपनियों को सौंपने के प्रस्ताव पर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा।

वे भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका की 21 अगस्त को की गई टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे।

इसरो ने पोस्ट में कहा कि जिन क्षेत्रों में उसकी वैज्ञानिक विशेषज्ञता सबसे अधिक मायने रखती है, उनमें उसकी भूमिका धीरे-धीरे मजबूत होगी — जैसे कि अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास, उन्नत प्रौद्योगिकी, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी की प्रक्षेपण प्रणाली, गहन अंतरिक्ष और ग्रहों के मिशन, और रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमताएं।

गोयनका ने रविवार को ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि इसरो का महत्व किसी भी तरह कम नहीं हो रहा है और यह भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की नींव बना रहेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘2020 से किए जा रहे सुधारों का मकसद भारत के पूरे अंतरिक्ष परिवेश का विस्तार करना है। इसका मकसद यह है कि उद्योग ज्यादा से ज्यादा संख्या में और बड़े पैमाने पर प्रक्षेपण यान, उपग्रह और अन्य उपकरण बना सके।’’

भाषा

सुभाष प्रशांत

प्रशांत


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