दुष्कर्म के झूठे आरोप, लोगों पर अमिट घाव छोड़ते हैं : दिल्ली उच्च न्यायालय

दुष्कर्म के झूठे आरोप, लोगों पर अमिट घाव छोड़ते हैं : दिल्ली उच्च न्यायालय

दुष्कर्म के झूठे आरोप, लोगों पर अमिट घाव छोड़ते हैं : दिल्ली उच्च न्यायालय
Modified Date: January 1, 2026 / 06:15 pm IST
Published Date: January 1, 2026 6:15 pm IST

नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि दुष्कर्म के झूठे आरोपों में किसी व्यक्ति को फंसाए जाने से आरोपी को ऐसे घाव मिलते हैं जो जिंदगी भर नहीं मिट सकते और कथित पीड़िता एवं आरोपी दोनों के लिए इसके दूरगामी परिणाम होते हैं।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा दिल्ली पुलिस द्वारा निचली न्यायाल के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर एक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई कर रही थीं।

पीड़िता के अपने पुराने बयानों से मुकर जाने के बाद सभी आरोपियों को निचली न्यायालय ने बरी कर दिया था।

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अदालत ने 15 दिसंबर के एक आदेश में कहा, ‘‘जिस आरोपी को झूठे आरोपों में फंसाया हुआ पाया जाता है, उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान, कारावास, सामाजिक कलंक और मानसिक पीड़ा ऐसे घाव छोड़ सकते हैं जो जीवन भर नहीं भर सकते। ये पीड़ा ठीक उसी तरह है जैसे यौन उत्पीड़न के वास्तविक मामलों में पीड़िता की गरिमा को चोट पहुंचती है।’’

अदालत ने कहा कि बिना किसी बाहरी दबाव के पीड़िता के बयान में आए पूरी तरह के बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा, ‘‘किसी दबाव या मजबूरी के बिना बयान को बाद में पूरी तरह बदल दिए जाने से गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं जिन्हें संवैधानिक अदालत नजरअंदाज नहीं कर सकती। ऐसा इसलिए क्यूंकि न सिर्फ कथित पीड़िता के लिए बल्कि आरोपी व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए भी दुष्कर्म के आरोपों के दुरगामी परिणाम होते है।’’

अदालत ने कहा कि इस तरह की झूठी शिकायतें आम लोगों के मन में संदेह तथा झिझक पैदा करती हैं और फिर सच्ची शिकायतों को भी शक भरी नजर से देखा जाता है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब गंभीर आरोप लगाए जाते हैं और फिर बिना किसी स्पष्टीकरण के वापस ले लिए जाते हैं, तो इससे यौन हिंसा के पीड़ितों की सुरक्षा के लिए बनाई गई प्रक्रिया पर जनता का विश्वास कम होता जाता है। इसका दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम यह होता है कि जिन महिलाओं से वास्तव में ऐसे अपराधों किए गए हैं उनकी आवाज पर सवाल उठाए जा सकते हैं या उनकी पीड़ा पर संदेह किया जा सकता है।’’

न्यायाधीश उस मामले की सुनवाई कर रही थीं जिसमें एक महिला ने तीन पुरुषों पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था, लेकिन उसने मुकदमे के दौरान अपना बयान वापस ले लिया।

महिला ने स्वीकार किया कि उसे आरोपियों द्वारा मजबूर नहीं किया गया था और वह आरोपियों में से एक के साथ स्वेच्छा से संबंध में थी।

भाषा यासिर माधव

माधव


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