फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर में शांति के लिए राष्ट्रीय एकता की अपील की

फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर में शांति के लिए राष्ट्रीय एकता की अपील की

फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर में शांति के लिए राष्ट्रीय एकता की अपील की
Modified Date: February 17, 2026 / 07:37 pm IST
Published Date: February 17, 2026 7:37 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

तिरुवनंतपुरम, 17 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने देश से केंद्र-शासित प्रदेश के लोगों की शांति और गरिमा के लिए लड़ाई में एकजुट होने की मंगलवार को अपील की।

अब्दुल्ला केरल राज्य योजना आयोग की ओर से यहां विकास और लोकतंत्र के विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘विजन-2031’ के समापन समारोह में बोल रहे थे। अब्दुल्ला के भावपूर्ण संबोधन को ध्यानपूर्वक सुन रहे मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सीट पर लौटने पर उन्हें गर्मजोशी से गले लगाया।

अब्दुल्ला ने कहा, “हम आपकी ओर देखते हैं और मन ही मन कहते हैं, अल्लाह! तू कब जागेगा, ताकि हम भी आजादी से चल सकें, आजादी से बोल सकें, आजादी से सोच सकें। यही तो लोकतंत्र है-लोगों का, लोगों के लिए, लोगों द्वारा… हमारे बच्चे और हमारे लोग, जिन्होंने दुख झेला है, वे आज भी उत्तर में दुख झेल रहे हैं। हां, उन्हें पाकिस्तानी कहकर पुकारा जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हमारे बच्चों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। यह सब कब खत्म होगा?”

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के वरिष्ठ नेता ने नम आंखों और रुंधे गले से कहा कि दक्षिण अब भी उन सांप्रदायिक ताकतों से मुक्त है, जो देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा, “मैंने 90 साल की उम्र में यह यात्रा इसलिए की, ताकि आप सभी से कह सकूं कि हमारे बारे में सोचें, हमारे लिए प्रार्थना करें, ताकि हम उत्तर में आज जिस त्रासदी का सामना कर रहे हैं, उससे बाहर निकल सकें। अल्लाह का शुक्र है कि दक्षिण अब भी स्वतंत्र है और मुझे आशा है कि यह स्वतंत्र रहेगा, विकसित होगा और मजबूत बनेगा। हमें आपसे ताकत मिलती है।”

भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर जम्मू-कश्मीर के भविष्य के बारे में आशंका जाहिर करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक समझौते पर कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं पेश की है।

जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से बागवानी और पर्यटन पर निर्भर करती है।

अब्दुल्ला ने कहा, “अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर हम डरे हुए हैं। हमारे पास तेल नहीं है, गैस नहीं है, बस अल्लाह की ओर से दी गई प्राकृतिक सुंदरता है। अब देखिए क्या हो रहा है, अगर यह सही है, क्योंकि उन्होंने आज तक नहीं बताया है कि समझौते में क्या है। हम बागवानी पर निर्भर हैं। हमारे सेबों, अखरोटों और बादामों का क्या होगा?”

उन्होंने कहा कि भारत को इस बारे में “निर्देश” दिया जा रहा है कि उसे रूसी तेल खरीदना चाहिए या नहीं, उसे क्या खरीदना और बेचना चाहिए, किस कीमत पर खरीदना और बेचना चाहिए।

नेकां नेता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर चुनावी जीत के लिए “लोगों को सांप्रदायिक रूप से बांटने” की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद-370 को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र-शासित प्रदेश बनाने से आतंकवाद का अंत नहीं हुआ है।

अब्दुल्ला ने कहा, “लेकिन अब मैं आपसे पूछता हूं, क्या अगस्त 2019 से आतंकवाद रुक गया है? क्या यह खत्म हो गया है? क्या आप पुलवामा को भूल गए हैं, जहां हमारे 40 बहादुर सैनिक मारे गए थे? क्या आप पहलगाम को भूल गए हैं? क्या आप हाल ही में उधमपुर को भूल गए हैं?”

उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से मानती रही है कि अनुच्छेद-370 जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का कारण है।

अब्दुल्ला ने कहा, “उन्होंने (भाजपा) कहा कि कश्मीर को सौगात में दिए गए अनुच्छेद-370 ने आतंकवाद को जन्म दिया। यही उनकी मुख्य दलील थी। और हुआ ये कि उन्होंने इस ढोल को पूरे देश में बजाया और आपने इस पर विश्वास कर लिया।”

नेकां प्रमुख ने कहा कि उनके राज्य को केंद्र-शासित प्रदेश में बदल दिया गया है और विधानसभा पूरी तरह से शक्तिहीन हो गई है।

उन्होंने कहा, “आप विधेयक पारित करते हैं। लेकिन वे उपराज्यपाल के पास अटक जाते हैं। आज तक व्यापार संबंधी नियम पूरे नहीं हुए हैं और राज्य को नहीं सौंपे गए हैं।”

अब्दुल्ला ने हर चीज को केंद्रीकृत करने और राज्य सरकारों की शक्तियों में “असंवैधानिक रूप से हस्तक्षेप” करने के केंद्र के कथित प्रयासों की भी कड़ी आलोचना की।

उन्होंने आरोप लगाया, “भारत एक संघीय देश है, जहां राज्यों के पास अपनी शक्ति होती है और केंद्र के पास अपनी तथा दोनों मिलकर एक बेहतर भविष्य के लिए काम करते हैं। लेकिन आज हालात ऐसे नहीं हैं। आज केंद्र हर चीज को नियंत्रित करता है। यहां तक कि वह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में भी दखल देता है और हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।”

अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र की ओर से डाली गई अड़चनों के बावजूद केरल विकास के पथ पर अग्रसर रहा। उन्होंने विजयन से इसके पीछे की वजह जाननी चाही।

नेकां नेता ने कहा, “मुख्यमंत्री के भाषण को सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ कि केंद्र सरकार की तमाम अड़चनों के बावजूद वह राज्य में इस कदर विकास सुनिश्चित करने में कामयाब रहे हैं कि गरीबी लगभग खत्म हो चुकी है। यह सुनकर वाकई बहुत अच्छा लगा।”

उन्होंने कहा कि यह वह भारत नहीं है, जिसके लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने लड़ाई लड़ी थी, बल्कि वे एक ऐसे भारत के लिए लड़े थे, जो सभी के लिए हो।

अब्दुल्ला ने कहा, “यह वह लोकतंत्र नहीं है, जिसके लिए लोगों ने संघर्ष किया था। हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों को इस देश से इसलिए नहीं निकाला था कि उन्हें ऐसा लोकतंत्र मिले, जहां वे बंदी की तरह रहें। उन्होंने ऐसे भारत के लिए संघर्ष किया, जो सभी के लिए हो, चाहे आप जहां के भी हों, कुछ भी खाते हों, किसी भी तरह से रहते हों, किसी भी धर्म का पालन करते हों या किसी की भी पूजा करते हों। यही वह लड़ाई थी, जो उन्होंने लड़ी थी। अगर गांधी जी फिर से उठ खड़े हुए, तो उन्हें इस देश की हालत देखकर शर्म आएगी।”

उन्होंने विजयन की तरफ इशारा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री महोदय, मैं इस बात की बहुत सराहना करता हूं कि आपका राज्य न केवल केरल, बल्कि पूरे देश के हर धर्म और हर इंसान का सम्मान करता है।”

भाषा पारुल नेत्रपाल

नेत्रपाल


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