एफसीआरए विधेयक ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए : द्रमुक सांसद विल्सन
एफसीआरए विधेयक ईसाइयों को निशाना बनाने के लिए : द्रमुक सांसद विल्सन
चेन्नई, चार अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के राज्यसभा सदस्य पी विल्सन ने शनिवार को दावा किया कि केंद्र सरकार ईसाइयों की संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए एफसीआरए विधेयक लाई है और अल्पसंख्यकों को उनकी संपत्तियों से वंचित करने में कोई राष्ट्रीय हित नहीं हो सकता है।
पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया कि केंद्र सरकार का विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) विधेयक पेश करने का इरादा ईस्टर के दौरान ईसाइयों को निशाना बनाना और उनमें आशंका पैदा करना था।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए एफसीआरए विधेयक, 2026 की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि इसका एकमात्र उद्देश्य ईसाई मिशनरियों, गैर सरकारी संगठनों और चर्च को निशाना बनाना है।
विल्सन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पूर्वव्यापी प्रभाव से संपत्तियों से वंचित करने का प्रावधान कठोर है, यह घर में बंदूक का भय दिखाकर लूटपाट करने के समान है।’’
द्रमुक सांसद ने दावा किया कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया, जब ईसाई ईस्टर मना रहे थे और इससे न केवल उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची, बल्कि भय भी पैदा हुआ। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि सरकार को ईसाई-संचालित संस्थानों, जिनमें शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और अनाथालय शामिल हैं, पर कब्जा करने में क्या राष्ट्रीय हित दिखाई देता है।
द्रमुक सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ इस मुद्दे को उठाया है और वह इस संशोधन को पारित नहीं होने देंगे। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 25 मार्च को लोकसभा में एफसीआरए संशोधन विधेयक पेश किया। उन्होंने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और विदेशी कोष का उचित उपयोग सुनिश्चित करना है, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के खिलाफ उनके दुरुपयोग को रोकना है।
विल्सन ने दावा किया कि 2014 से भाजपा ‘‘सोची-समझी रणनीति’’ के तहत विदेशी दानदाताओं द्वारा ईसाई मिशन और गिरिजाघरों को दी जाने वाली धनराशि में कटौती की।
उन्होंने आरोप लगाया कि उचित प्रावधानों वाले भूमि अधिग्रहण कानूनों के विपरीत इस संशोधन ने विद्यालयों, महाविद्यालयों, अस्पतालों और अनाथालयों जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों को तुरंत जब्त करने का प्रावधान है, जिससे गरीबों को, चाहे वे किसी भी धर्म से संबंधित हों, इन सेवाओं का लाभ उठाने से वंचित होंगे।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने दावा किया, ‘‘2014 से अबतक, मोदी सरकार जानबूझकर इन संगठनों को बर्बाद करने के लिए काम कर रही है, जिसके तहत 2020 में 2,500 ईसाई संस्थाओं सहित 20,000 से अधिक धर्मार्थ संस्थाओं के लाइसेंस रद्द कर दिये गए थे और अक्सर इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि हालांकि इन संशोधनों से संबंधित मौजूदा विधेयक को चुनावों के कारण स्थगित कर दिया गया है, लेकिन आशंका बनी हुई है कि इसे बाद में पारित कर दिया जाएगा। विल्सन ने कहा कि द्रमुक ने संसद में इसका विरोध करने का संकल्प लिया है।
द्रमुक नेता ने कहा कि अतीत में सरकार ने मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को निशाना बनाया था।
भाषा धीरज माधव
माधव

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