Chhattisgarh Right to Education Act: इस साल RTE के तहत एडमिशन दिलाना होगा मुश्किल!.. प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने सहयोग नहीं करने एक लिया फैसला, जानें क्या है वजह
Chhattisgarh Right to Education Act: छत्तीसगढ़ में इस साल RTE प्रवेश में मुश्किल, निजी स्कूल मैनेजमेंट ने सहयोग न करने का निर्णय लिया।
Chhattisgarh Right to Education Act || Image- Pinterest File
- निजी स्कूलों ने RTE प्रवेश में भाग नहीं लिया
- एसोसिएशन ने विभाग की लापरवाही को बताया कारण
- हजारों गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने इस वर्ष शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग न करने का निर्णय लिया है। (Chhattisgarh Right to Education Act) संघ का कहना है कि लंबे समय से प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है, और स्कूल शिक्षा विभाग के लापरवाह रवैये के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
निजी स्कूल नहीं लेंगे प्रक्रिया में हिस्सा
प्रदेश के 6000 से अधिक निजी स्कूलों में इस माह RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया प्रस्तावित है, जिसमें ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। चयनित बच्चों को संबंधित स्कूलों में प्रवेश देना अनिवार्य होता है, लेकिन इस बार निजी स्कूल इस प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे।
क्या है एसोसिएशन के आरोप?
एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि विभाग की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के हजारों गरीब और वंचित बच्चों पर पड़ सकता है, (Chhattisgarh Right to Education Act) जो RTE के माध्यम से निजी स्कूलों में प्रवेश पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जानें शिक्षा का अधिकारी (2009) कानून के बारें में
शिक्षा का अधिकार (Right to Education Act, 2009) भारत में एक महत्वपूर्ण कानून है जो हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। इसे “RTE Act” भी कहा जाता है। इस कानून के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
किन बच्चों के लिए है:
- यह कानून 6 से 14 साल के बच्चों पर लागू होता है।
- सभी बच्चों को पढ़ाई का अधिकार है, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति, जाति, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा:
- स्कूलों में पढ़ाई मुफ्त होगी।
- बच्चों को स्कूल जाने से रोकना या पढ़ाई से वंचित रखना कानूनन अपराध है।
शिक्षा की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाएँ:
- स्कूलों में उचित शिक्षकों, पुस्तकें, शिक्षण सामग्री और सुरक्षित वातावरण की व्यवस्था होनी चाहिए।
- स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ खेल, स्वास्थ्य और बच्चों का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित किया जाता है।
अवसंरचना और प्रवेश:
- निजी स्कूलों में भी गरीब बच्चों के लिए 25% सीट आरक्षित की जाती है।
- बच्चों को प्रवेश दिलाने और उनकी शिक्षा पूरी कराने की जिम्मेदारी सरकार और स्कूल दोनों की होती है।
इस तरह आरटीई कानून हर बच्चे के लिए मुफ्त, अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है। यह कानून बच्चों को शिक्षा से वंचित होने से बचाता है और उन्हें समाज में बराबरी का अवसर देता है।
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